
जबलपुर। मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने कांग्रेस नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही पर की जा रही टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताया है। जबलपुर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय राजनीति में न्यायपालिका का हमेशा सम्मान रहा है, लेकिन हाल ही में मीनाक्षी नटराजन के मामले में कांग्रेस के बड़े नेताओं ने कोर्ट पर सवाल उठाकर एक बेहद गलत परंपरा की शुरुआत की है। राकेश सिंह ने देश की सर्वोच्च अदालत से इस पूरे मामले में स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है ताकि भविष्य में कोई भी राजनीतिक दल न्यायालय की मर्यादा को ठेस न पहुंचा सके। उन्होंने कांग्रेस को नसीहत दी कि वे अपनी संगठनात्मक कमियों को छिपाने के लिए न्यायपालिका पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय आत्ममंथन करें क्योंकि कांग्रेस विधायकों के रुख को देखते हुए परिणाम पहले से ही तय था।
न्यायपालिका के सम्मान पर गहराता राजनीतिक विवाद
भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में हमेशा से कोर्ट के फैसलों और उसकी कार्यवाही को राजनीति से दूर रखा गया है। लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह का मानना है कि अब तक सभी दलों के नेता अदालत का आदर करते थे, लेकिन वर्तमान में विपक्षी दल के रवैये ने इस मर्यादा को तोड़ा है। कांग्रेस के शीर्ष नेताओं द्वारा सुप्रीम कोर्ट के फैसलों पर खुलकर बयानबाजी करना देश के संवैधानिक ढांचे के लिए सही संकेत नहीं है। इस तरह के बयानों से जनता के बीच न्यायपालिका की निष्पक्ष छवि पर गलत असर पड़ता है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
सर्वोच्च अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की मांग
राजनीति में कोर्ट को घसीटने की इस नई परिपाटी को रोकने के लिए लोक निर्माण मंत्री ने सीधे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि वह इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से ले। सुप्रीम कोर्ट को उन सभी नेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगना चाहिए जिन्होंने उसकी गरिमा को कम करने की कोशिश की है। जब तक ऐसी हरकतों पर कानूनी रूप से सख्त कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक राजनीतिक लाभ के लिए संवैधानिक संस्थाओं पर उंगली उठाने का यह सिलसिला थमेगा नहीं।
विपक्षी दल की संगठनात्मक कमजोरी पर कड़ा प्रहार
मीनाक्षी नटराजन के मामले को लेकर सत्तापक्ष ने विपक्षी दल के कामकाज के तरीके को पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है। मंत्री राकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में कांग्रेस के पास न तो कोई ठोस तैयारी थी और न ही उनका नेतृत्व सही समय पर सही फैसला ले पाया। अपनी प्रशासनिक और रणनीतिक विफलताओं को स्वीकार करने के बजाय कांग्रेस नेता दूसरों पर दोष मढ़ने में लगे हैं। यदि पार्टी समय रहते अपनी कमियों को दूर नहीं करती है, तो उसे भविष्य में भी इसी तरह की सांगठनिक हार का सामना करना पड़ेगा।
भीतरघात और चुनावी हार की जमीनी हकीकत
राजनैतिक हलकों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि मीनाक्षी नटराजन का चुनाव हारना लगभग तय था। यदि वह अपना नामांकन पत्र दाखिल भी कर देतीं और मतदान की नौबत आती, तब भी उनकी पराजय निश्चित थी। इसका मुख्य कारण यह था कि खुद कांग्रेस के विधायक ही इस चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने के पक्ष में नहीं थे। बड़ी संख्या में विधायकों के इस असहयोग से साफ है कि पार्टी के भीतर गहरा असंतोष है। ऐसे में कोर्ट की कार्यवाही को अपनी हार का बहाना बनाना पूरी तरह से तर्कहीन है।
