जाली दस्तखत कर वीआईपी कोटे की कालाबाजारी करने वाले निलंबित रेल कर्मी पर गिरेगी गाज

जबलपुर। पश्चिम मध्य रेलवे के प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक कार्यालय में पदस्थ रहे स्टेनो अमित आनंद के खिलाफ रेल प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए मेजर पेनल्टी चार्जशीट जारी कर दी है। वीआईपी कोटा की सीटों की कालाबाजारी के गंभीर आरोपों में घिरे इस कर्मचारी पर अब सीधे सेवा से बर्खास्तगी की गाज गिर सकती है। इस पूरे घोटाले का खुलासा लगभग 1 महीने पहले हुआ था, जिसके बाद आरोपी को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया था। जांच में यह सनसनीखेज बात सामने आई है कि अमित आनंद सक्षम रेल अधिकारी के जाली हस्ताक्षर का उपयोग करके धड़ल्ले से वीआईपी कोटे की सीटें बुक कर रहा था। हद तो तब हो गई जब निलंबन अवधि के दौरान भी उसने यह अवैध धंधा बंद नहीं किया और दूसरे रेलवे जोन में भी वीआईपी कोटा का खेल लगातार जारी रखा। इस अवैध काम के बदले वह दलालों और यात्रियों से सीधे अपने निजी बैंक खाते में यूपीआई के माध्यम से डिजिटल भुगतान ले रहा था।
फर्जी हस्ताक्षर से कोटा आवंटन और डिजिटल रिश्वत का खेल
रेलवे की जांच टीम ने इस पूरे मामले में दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य जुटाए हैं, जिनसे साफ हुआ है कि आरोपी स्टेनो वीआईपी कोटे के फॉर्म पर वरिष्ठ अधिकारी के नकली दस्तखत करता था। इन जाली हस्ताक्षरों के दम पर सीटों को कंफर्म करा लिया जाता था और फिर उन्हें जरूरतमंद लोगों को महंगे दामों पर बेच दिया जाता था। इस अवैध कमाई को सुरक्षित रखने के लिए आरोपी अमित आनंद सीधे नकदी लेने के बजाय अपने खाते में यूपीआई ट्रांसफर करवाता था। 1 महीने पहले पकड़े जाने के बाद विभागीय स्तर पर बैंक खातों की जांच की गई, जिसमें लगातार हुए इन संदिग्ध लेन-देन का पूरा सच सामने आ गया और इसी आधार पर अब उसे नौकरी से निकालने तक का कड़ा प्रावधान वाली चार्जशीट सौंपी गई है।
सस्पेंशन में भी बेखौफ, दूसरे रेल मंडलों तक फैलाया जाल
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि विभागीय कार्रवाई और निलंबन की सजा भी आरोपी के हौसले पस्त नहीं कर पाई। सस्पेंड होने के बाद नियमों के मुताबिक कर्मचारी को मुख्यालय में अपनी उपस्थिति देनी होती है, लेकिन अमित आनंद इस दौरान दूसरे रेलवे जोन के नेटवर्क में सक्रिय हो गया। वहां भी उसने वीआईपी सीटों की कालाबाजारी का अपना पुराना ढर्रा अपना लिया और लगातार अवैध बुकिंग कराता रहा। जांच अधिकारियों के अनुसार, आरोपी का यह बेखौफ अंदाज बताता है कि उसका यह नेटवर्क कितना मजबूत था, जो सस्पेंशन के दौरान भी बिना किसी डर के दूसरे क्षेत्रों में काम कर रहा था। अमित आनंद को मेजर पेनल्टी जारी करने के साथ ही रेल प्रशासन अब इस पूरे रैकेट की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश में जुट गया है। प्रमुख मुख्य वाणिज्य प्रबंधक कार्यालय के कुछ अन्य बाबुओं और कर्मचारियों की गतिविधियां भी अब जांच के घेरे में आ चुकी हैं। विजिलेंस टीम दफ्तर के कई अन्य संदिग्धों की पूरी कुंडली और उनके पुराने सेवा रिकॉर्ड को खंगाल रही है। आशंका जताई जा रही है कि रोजाना होने वाले इस जाली हस्ताक्षर के खेल में दफ्तर के कुछ और लोगों की मूक सहमति या सीधा जुड़ाव हो सकता है, जिसके चलते आने वाले दिनों में कुछ और नामजद कार्रवाई देखने को मिल सकती हैं।
