
जबलपुर। प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत प्राध्यापकों ने अपनी वर्षों पुरानी लंबित मांगों के निराकरण के लिए आंदोलन का शंखनाद कर दिया है। प्रांतीय शासकीय प्राध्यापक संघ के तत्वावधान में 1 जुलाई से पूरे प्रदेश में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस दौरान प्राध्यापक काली पट्टी धारण कर अपने कार्य का निर्वहन करेंगे और जिला स्तर से लेकर संभाग स्तर तक विरोध दर्ज कराएंगे। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि परिवीक्षा अवधि समाप्त न होने, वेतनमान न मिलने और पदोन्नति सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा लगातार उदासीनता बरती जा रही है। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष और संरक्षक द्वारा अपर सचिव को 21 दिन पूर्व नोटिस दिए जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस आंदोलन की रणनीति को लेकर हुई संभागीय बैठक में संभागीय अध्यक्ष प्रोफेसर अरुण शुक्ल सहित डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव, डॉ. ए. सी. तिवारी, डॉ. शैलप्रभा कोष्टा, डॉ. राजेश श्यामकुवर, डॉ. ज्योति जुन्गारे, डॉ. देवेंद्र कोष्ठा, डॉ. विभा चौधरी, डॉ. रवीश तमन्ना ताजिर, डॉ. राहुल पटेल, डॉ. अजय ठाकुर, डॉ. संघप्रिया तिवारी, डॉ. महेंद्र कुशवाहा, डॉ. विपिन, श्रीमती ललिता लोधी, डॉ. शैलेंद्र भवदिया, डॉ. विजेंद्र विश्वकर्मा, डॉ. मनीष गुजराती, डॉ. तरुनेन्द्र साकेत और मनोज कुमार जैन उपस्थित थे।
वर्षों से लंबित मांगों पर प्रशासन का मौन
शिक्षकों की प्रमुख समस्याओं में वर्षों से लंबित परिवीक्षा अवधि का समापन, देय वेतनमानों का भुगतान और पदनाम के साथ पदोन्नति शामिल है। इन मांगों को लेकर संघ ने कई बार पत्राचार किया, लेकिन शासन स्तर से अभी तक कोई भी स्वीकृति प्रदान नहीं की गई है। आंदोलन के प्रथम चरण में सभी प्राध्यापक अपने-अपने क्षेत्र के विधायकों, मंत्रियों और सांसदों को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा से अवगत कराएंगे। यदि इसके बाद भी शासन का रुख सकारात्मक नहीं होता है, तो संघ द्वारा आगामी समय में आंदोलन को और अधिक तीव्र करने की कार्ययोजना घोषित की जाएगी।
मांगें पूरी न होने पर बढ़ेगा आंदोलन
प्राध्यापक संघ ने स्पष्ट किया है कि यह विरोध प्रदर्शन अपनी मांगों को मनवाने के लिए किया जा रहा है। शिक्षक लंबे समय से उपेक्षा के शिकार हैं और उन्हें उनके वाजिब हक से वंचित रखा जा रहा है। आंदोलन के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी गई है कि प्रशासनिक ढिलाई के कारण उत्पन्न स्थिति के लिए शासन स्वयं जिम्मेदार होगा। संघ के पदाधिकारी एकजुट हैं और अपनी मांगों के निराकरण तक पीछे नहीं हटेंगे। आगामी दिनों में होने वाली बैठकों के आधार पर आंदोलन को और व्यापक रूप देने की तैयारी की जा रही है, ताकि सरकार पर उनकी जायज मांगों को पूरा करने का दबाव बनाया जा सके।
