पीएम मोदी के मन की बात:एथलीट्स के कीर्तिमान से लेकर चोल ताम्र पट्टिकाओं तक की गाथा गूंजी

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Newzo - News Editor 87 Views
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जबलपुर। भारतीय जनता पार्टी ने जबलपुर महानगर के सभी 1041 बूथों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम के 134वें संस्करण का सामूहिक श्रवण किया। जिला अध्यक्ष रत्नेश सोनकर ने उत्तर विधानसभा के कृषि उपज मंडी प्रांगण में, जिला प्रभारी आलोक संजर ने ग्वारीघाट वार्ड में नाविकों के साथ, जेडीए अध्यक्ष संदीप जैन ने कृषि विश्वविद्यालय में, महापौर जगतबहादुर सिंह अन्नू और नगर निगम अध्यक्ष रिकुंज विज ने स्मार्ट सिटी सभागार में यह कार्यक्रम सुना। महामंत्री पंकज दुबे, रंजीत पटेल, श्रीकांत साहू और कार्यक्रम प्रभारी राजेश मिश्रा सहित समस्त पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और आम जनता ने इस विशेष प्रसारण को सुना, जिसमें खेल रिकॉर्ड, पारंपरिक खानपान और ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष चर्चा की गई।

​राष्ट्रीय खेल कीर्तिमान और युवा प्रतिभाओं की सराहना

​प्रधानमंत्री ने रांची में आयोजित नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन कॉम्पटीशन की सफलता का उल्लेख किया। इस प्रतियोगिता में देश के कोने-कोने से आए 800 एथलीट्स ने हिस्सा लिया, जहां चार अलग-अलग इवेंट में नए राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित हुए। गुरिंदरवीर सिंह, विशाल टीके, तेजस्विन शंकर, देव मीणा और कुलदीप कुमार जैसे होनहार खिलाड़ियों ने विभिन्न श्रेणियों में नए रिकॉर्ड बनाकर देश का नाम रोशन किया। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन पर इन सभी एथलीट्स को बधाई देते हुए खेल के क्षेत्र में देश के बढ़ते कदम और युवाओं की कड़ी मेहनत की सराहना की गई।

​पारंपरिक पेय पदार्थों से गर्मी से बचाव का मंत्र

​बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी के इस मौसम में सुरक्षित रहने के लिए रसोई के पारंपरिक ज्ञान को अपनाने की सलाह दी गई। देश के विभिन्न हिस्सों में मिलने वाले स्वदेशी पेय पदार्थ न केवल शरीर को शीतलता देते हैं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी हैं। उत्तर भारत का आम पन्ना, पंजाब-हरियाणा की लस्सी, राजस्थान-गुजरात की छाछ, बिहार-झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश का सत्तू शरबत, कोंकण-गोवा का कोकम शरबत एवं सोल कढ़ी, दक्षिण भारत का पानकम, नीर मोर व सम्बारम और ओडिशा का बेल पना हमारी समृद्ध भारतीय परंपरा का हिस्सा हैं।

​जल संरक्षण, जीव सुरक्षा और ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी

​देश की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों को सहेजने के क्रम में नीदरलैंड से वापस लाई गई चोल साम्राज्य की ताम्र पट्टिकाओं का विशेष जिक्र किया गया। इसके साथ ही ज्ञान भारतम् अभियान, खगोल विज्ञान, गंगा डॉल्फिन के संरक्षण, स्वच्छता अभियान और समाज में दान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। नदियों को बचाने के जन-अभियान और मनोरमा नदी के पुनरुद्धार के प्रयासों की सराहना करते हुए नागरिकों से अपील की गई कि वे पर्यावरण संरक्षण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभाएं और मौसम के बदलाव के बीच अपने स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखें।

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