राष्ट्रपति के मुख्य आतिथ्य वाले गरिमामयी कार्यक्रम की प्रशासनिक सूची से कई शीर्ष जनप्रतिनिधियों के नाम गायब होने पर खड़े हुए तीखे सवाल

जबलपुर। जबलपुर में 21 जून 2026 को आयोजित होने वाले 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र एक बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के मुख्य आतिथ्य में गैरिसन ग्राउंड पर सुबह 6.00 बजे होने वाले इस सामूहिक योगाभ्यास कार्यक्रम में कई बड़े नेताओं के नाम गायब हैं। आमंत्रण पत्र में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार और सांसद आशीष दुबे के नाम तो शामिल हैं, लेकिन राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि, राज्यसभा सांसद विवेक तंखा और शहर के प्रथम नागरिक महापौर जगत बहादुर सिंह का नाम शामिल नहीं होने पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर हुई इस उपेक्षा से स्थानीय नेताओं में भारी नाराजगी
प्रशासनिक स्तर पर हुई इस कथित उपेक्षा से शहर के राजनीतिक गलियारों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। शहरवासियों और सियासी जानकारों के बीच यह चर्चा तेज है कि योग के मंच पर जहां संतुलन की बात सिखाई जाती है, वहीं इस आमंत्रण पत्र में संतुलन पूरी तरह से गायब दिखाई दे रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जिला प्रशासन ने कुछ महत्वपूर्ण नामों को इस तरह से सूची से बाहर कर दिया है, जैसे योग क्रिया के दौरान सांसों को रोक लिया जाता है। इससे पहले उपराष्ट्रपति जगदीश धनखड़ के जबलपुर आगमन पर भी महापौर को प्रोटोकॉल नहीं मिलने का मामला काफी गर्म रहा था। उस समय महापौर कांग्रेस पार्टी के सदस्य थे, जबकि अब वह सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो चुके हैं। राजनीतिक विश्लेषक अब इस बात पर तंज कस रहे हैं कि दल बदलने के बाद भी महापौर के लिए प्रोटोकॉल का योग अधूरा ही रह गया है। सूत्रों के अनुसार राज्यसभा सांसद सुमित्रा वाल्मीकि ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नाराजगी जताते हुए अपनी लिखित आपत्ति राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के पास भेज दी है।
विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं की अनदेखी बता रहा
विपक्ष इस पूरे मामले को लोकतांत्रिक व्यवस्था और तय मर्यादाओं की सीधे तौर पर अनदेखी करार दे रहा है। वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक औपचारिक सरकारी सूची है और इसमें किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया है। वर्तमान में पूरे जबलपुर शहर में चर्चा इस विषय की बिल्कुल नहीं हो रही है कि 21 जून को मुख्य मैदान पर कौन से योगासन किए जाएंगे, बल्कि लोगों के बीच चर्चा का एकमात्र विषय यही बना हुआ है कि प्रोटोकॉल के तहत पात्रता होने के बाद भी इन शीर्ष नेताओं के नाम आमंत्रण पत्र से क्यों गायब रखे गए। राजनीतिक स्तर पर इसे एक सोची-समझी प्रशासनिक भूल माना जा रहा है।
विवाद के बीच जिला प्रशासन योगाभ्यास की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा
इस बड़ी राजनीतिक खींचतान और बयानबाजी के बीच जिला प्रशासन मुख्य योगाभ्यास कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने में लगा हुआ है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि योग दिवस की शुरुआत से पहले ही शहर की सियासत में प्राणायाम से ज्यादा नमायाम का दौर शुरू हो चुका है। अब देखना यह होगा कि आमंत्रण पत्र से शुरू हुआ विवाद का यह आसन मुख्य कार्यक्रम से पहले शांत हो पाता है या फिर राजनीति की यह रस्साकशी आने वाले दिनों में और अधिक लंबी खिंचेगी। फिलहाल प्रशासनिक अमला स्थिति को सामान्य करने के प्रयासों में जुटा हुआ है ताकि राष्ट्रपति के आगमन पर कार्यक्रम का सफल आयोजन सुनिश्चित किया जा सके।
