जबलपुर : तीस लाख की खरीदी में बड़ा खेल, जांच समिति ने पकड़ी चोरी, तत्काल थमाया तबादला

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Newzo - News Editor 62 Views
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जबलपुर। वेटरनरी विश्वविद्यालय में करीब 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य की फर्नीचर खरीदी में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। गठित पांच सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में महू वेटरनरी कालेज के लिए की गई खरीदी में कई गंभीर गड़बड़ियां उजागर होने के बाद सिविल एवं सप्लाई कार्यों से जुड़े प्रोफेसर एसएस कारमोरे का तबादला जबलपुर से महू कर दिया गया है। टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर एक ऐसी कंसल्टेंसी कंपनी को ठेका देने का आरोप है, जिसके पास फर्नीचर निर्माण या विक्रय का कोई अनुभव नहीं था। इस मामले में छात्र संगठन एबीवीपी के प्रदर्शन के बाद जांच तेज हो गई है, जिसमें कुछ अधिकारियों द्वारा निजी लाभ के लिए कंपनी को फायदा पहुंचाने और महू कॉलेज में घटिया गुणवत्ता का फर्नीचर सप्लाई किए जाने की बात भी सामने आई है। कुलपति प्रो. मनदीप शर्मा ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

​टेंडर प्रक्रिया में चहेती कंसल्टेंसी कंपनी को उपकृत करने का आरोप

​जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, महू कॉलेज के लिए लाखों रुपये के फर्नीचर की खरीदी में नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया। जिस कंपनी को इस काम का बड़ा ठेका दिया गया, उसका मूल काम फर्नीचर बनाना या बेचना था ही नहीं, बल्कि वह एक कंसल्टेंसी फर्म के रूप में काम करती थी। इस कंपनी के पास आवश्यक बुनियादी ढांचा और अनुभव न होने के बावजूद कुछ विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपसी साठगांठ कर उसे यह काम सौंप दिया। इस अपात्र कंपनी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से पूरी टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया, जिससे सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ।

​जांच के घेरे में आई सामग्री की गुणवत्ता और जिम्मेदार अधिकारी

​मामला उजागर होने के बाद जांच का दायरा तेजी से बढ़ गया है। शुरुआती जांच में यह तथ्य भी प्रकाश में आया है कि महू वेटरनरी कॉलेज परिसर में जो भी फर्नीचर सप्लाई किया गया है, उसकी गुणवत्ता बेहद खराब है और वह तय मानकों पर बिल्कुल भी खरा नहीं उतरता है। इस पूरे सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों को बेनकाब करने के लिए प्रशासन विस्तृत जांच कर रहा है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मनदीप शर्मा ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों के आधार पर निष्पक्षता से जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर इस भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए जाने वाले हर एक दोषी कर्मचारी या अधिकारी के विरुद्ध नियमानुसार बेहद कठोर कदम उठाए जाएंगे।

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