
जबलपुर। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर अचानक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता के राज्यसभा चुनाव के मैदान में निर्दलीय उतरने की चर्चाओं ने सियासी समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। भाजपा के भीतर इस संभावित दावेदारी को लेकर भारी बेचैनी देखी जा रही है। नामांकन जमा करने की आखिरी तारीख 8 जून यानी कल है, जिससे पहले राजधानी भोपाल में जबरदस्त राजनीतिक ड्रामा शुरू हो चुका है। भाजपा ने रणनीति के तहत अपने सभी विधायकों को भोपाल तलब कर लिया है, जबकि कांग्रेस भी अपने विधायकों की सुरक्षा और घेराबंदी में जुट गई है। इस शह और मात के खेल में दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
भोपाल में विधायकों की बाड़ेबंदी और भाजपा की आपात बैठक
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के सामने आने के बाद सत्तारूढ़ दल भाजपा पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा के वरिष्ठ रणनीतिकारों ने आनन-फानन में सभी भाजपा विधायकों को भोपाल पहुंचने के निर्देश जारी किए हैं। भाजपा विधायक दल की बैठक में क्रॉस वोटिंग के खतरे और चुनावी रणनीति पर बंद कमरे में मंथन चल रहा है। विधायकों को एकजुट रखने के लिए सख्त हिदायत दी गई है। दूसरी तरफ कांग्रेस खेमे में भी बैठकों का दौर जारी है। कांग्रेस आलाकमान अपने विधायकों से लगातार संपर्क बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह की टूट को रोका जा सके। दोनों ही दल अपने-अपने विधायकों पर कड़ी निगरानी रख रहे हैं।
आखिरी दिन के नामांकन पर टिकीं सबकी निगाहें
मध्य प्रदेश की इस सियासी उठापटक का असली फैसला 8 जून को नामांकन के अंतिम समय पर होगा। यदि पूर्व मुख्यमंत्री अपना पर्चा दाखिल करते हैं, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का हो जाएगा। भाजपा के पास विधानसभा में बहुमत होने के बावजूद कांग्रेस रणनीति के तहत अतिरिक्त सीट पर सेंधमारी की कोशिश में है। कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार कांग्रेस कुछ असंतुष्ट विधायकों और निर्दलीयों के भरोसे खेल पलटने का दावा कर रही है। दोनों तरफ से जीत के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन असली हकीकत कल दोपहर तक पूरी तरह साफ हो जाएगी कि कौन सा धड़ा किस पर भारी पड़ता है।
