दतिया उपचुनाव के बाद शुरू होगा नियुक्तियों का दौर, बड़े दरबारों में लगी दावेदारों की कतार

जबलपुर। मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति वर्ग के कल्याण के लिए काम करने वाले विभिन्न निगमों, मंडलों, बोर्डों और आयोगों में लंबे समय से अटकी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर अब हलचल काफी तेज हो गई है। राज्य में दतिया उपचुनाव के बाद इन खाली पदों पर ताजपोशी का काम शुरू होने के साफ संकेत दिखाई दे रहे हैं। 16 फीसदी से अधिक एससी आबादी वाले राज्य में 35 सीटें इस वर्ग के लिए आरक्षित हैं। सरकार ने पहले 5 दर्जनों से ज्यादा संस्थाओं में राजनीतिक नियुक्तियां की हैं। हाल में अनुसूचित जाति आयोग की कमान डॉ. कैलाश जाटव को सौंपी गई है, लेकिन उपाध्यक्ष और 2 सदस्यों के पद अब भी खाली पड़े हैं। इसके अलावा संत रविदास उद्योग विकास निगम, राज्य सफाई कर्मचारी आयोग, अंत्यावसायी वित्त विकास निगम और बांस आयोग में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और संचालकों की नियुक्ति होनी है।
खाली पड़े संस्थानों में नए चेहरों की तलाश जारी
राज्य के अंतर्गत राज्य सफाई कामगार आयोग के अध्यक्ष प्रताप करोसिया का कार्यकाल सवा तीन साल से अधिक पूरा हो चुका है। इसी प्रकार अंत्यावसायी वित्त विकास निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर की नियुक्ति को भी लगभग 5 साल हो चुके हैं, जिनकी नियुक्ति पूर्ववर्ती शिवराज सरकार में हुई थी। अंत्यावसायी वित्त विकास निगम भोपाल के एमडी डॉ. सत्येंद्र सिंह के अनुसार इन पदों पर अगले आदेश तक नियुक्ति की बात रहती है। संत रविदास के नाम पर चल रहे निगम में पूर्व में नारायण कबीरपंथी अध्यक्ष रह चुके हैं। अब इन सभी निगमों और बोर्डों के संचालक मंडलों का पुनर्गठन होना है। केवल राज्य ही नहीं, बल्कि केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत आने वाले डॉ. अंबेडकर एवं बाबू जगजीवन राम फाउंडेशन जैसे संस्थानों में भी सदस्यों के पद खाली हैं।
संगठन में दावेदारों ने भोपाल से दिल्ली तक दौड़ लगाई
इन महत्वपूर्ण पदों को पाने के लिए भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने सत्ता और संगठन के सामने अपनी प्रबल दावेदारी पेश कर दी है। एससी बाहुल्य इन पदों के लिए करीब आधा दर्जन से अधिक संस्थाओं को लेकर बड़े नेता भोपाल से लेकर दिल्ली तक अपनी सक्रियता बढ़ा चुके हैं। प्रमुख दावेदारों में सागर के अमित कछवाह, गुना के रमेश मालवीय, उज्जैन की सुरेखा तंवर, भोपाल के रामस्वरूप शुक्रवारे, इंदौर के शैलेश गिरजे, उज्जैन के ओमप्रकाश मोहने, परासिया की ज्योति देहरिया, सिंगरोली के सुभाष वर्मा, ग्वालियर के मनीष राजोरिया, दतिया के मोहन पटवा, दतिया के दिलीप बाल्मीकि और जबलपुर के शिवराम बेन जैसे नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।
