खाकी पर लगा दाग: कटनी सीएसपी पर वसूली का आरोप, जबलपुर एडिशनल एसपी करेंगी पड़ताल

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Newzo - News Editor 30 Views
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जबलपुर। मध्य प्रदेश के कटनी की नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया पर वसूली और विभागीय लापरवाही के गंभीर आरोप लगे हैं। पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच जबलपुर की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल करेंगी। ट्रांसपोर्ट कारोबारी महेंद्र जैन ने 22 जुलाई को कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा से शिकायत की थी। पीड़ित के अनुसार 21 जुलाई की रात चेकिंग के नाम पर वाहन रोककर 30,000 रुपए मांगे गए। मौके पर 25,000 रुपए वसूले गए और 5,000 रुपए बाद में देना तय हुआ। मामले में एसपी ने आरक्षक केशव सिंह को सस्पेंड कर दिया। सीएसपी से कुठला, माधवनगर और रंगनाथ नगर थाने की जिम्मेदारी वापस लेकर अजाक डीएसपी शिवा पाठक को सौंपा। हत्या केस में 90 दिन में चालान न देने से आरोपी को बेल मिली और जमीन हड़पने के आरोप लगे।

​सड़क पर चेकिंग के बहाने वसूली का खेल

​रेत और डोलोमाइट का कारोबार करने वाले ट्रांसपोर्टर महेंद्र जैन की 5 गाड़ियां माल परिवहन में लगी हुई हैं। 21 जुलाई की रात चेकिंग के दौरान एक हाईवा वाहन को रोक लिया गया। वाहन छोड़ने के एवज में 30,000 रुपए की मांग की गई। मौके पर दबाव बनाकर 25,000 रुपए ले लिए गए। बाकी 5,000 रुपए अगले दिन चालक के माध्यम से भिजवाने का दबाव बनाया गया। अगर रुपए नहीं दिए जाते तो गाड़ियों को जब्त कर थाने में खड़ा करने की धमकी दी गई थी। पीड़ित कारोबारी ने इस पूरी घटना के साक्ष्य एकत्र किए और 22 जुलाई को सीधे कटनी एसपी के सामने पेश होकर न्याय की गुहार लगाई।

​कड़े फैसलों से छिना 3 थानों का प्रभार

​मामले की शिकायत मिलते ही प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। प्राथमिक जांच में आरोपों की पुष्टि होने पर कटनी एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने त्वरित कदम उठाए। सीएसपी के चालक और आरक्षक केशव सिंह को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। इसके साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के लिए सीएसपी नेहा पच्चीसिया की शक्तियों में कटौती की गई। उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले 3 महत्वपूर्ण पुलिस थानों कुठला, माधवनगर और रंगनाथ नगर का प्रभार वापस ले लिया गया। निष्पक्ष व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन तीनों थानों की कमान अजाक डीएसपी शिवा पाठक को सौंप दी गई है।

​चालान न पेश होने से मिला कानूनी लाभ

​वसूली का मामला सामने आने के तुरंत बाद सीएसपी के खिलाफ दो अन्य गंभीर लापरवाही के मामले उजागर हुए। एक हत्या के गंभीर प्रकरण में तय 90 दिनों की वैधानिक सीमा बीत जाने के बाद भी अदालत में चालान पेश नहीं किया गया। समय पर केस डायरी और चालान प्रस्तुत न होने के कारण हत्या के मुख्य आरोपी को अदालत से डिफॉल्ट बेल मिल गई। इस मामले को घोर विभागीय लापरवाही माना जा रहा है। यही नहीं, उसी आरोपी ने न्यायालय में सीएसपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। आरोपी का आरोप है कि उसे कानूनी फायदा पहुंचाने की एवज में उसकी मूल्यवान जमीन को कम कीमत पर बिकवा दिया गया। अब इन तमाम गंभीर प्रकरणों की निष्पक्ष जांच जबलपुर की एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल द्वारा की जा रही है।

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