
जबलपुर। इंदौर से जबलपुर आ रही 22191 ओवरनाइट एक्सप्रेस के पावर कार 161011 में शुक्रवार 17 जुलाई की सुबह तैनात टेक्नीशियन इलेक्ट्रिकल अनिल कुमार कुशवाहा के साथ एक हैरान करने वाली घटना घटी। ड्यूटी के दौरान जब वे पावर कार में आराम कर रहे थे, तब एक चूहे ने उनकी उंगली पर हमला कर दिया और उसे काट लिया। इस अचानक हमले से कर्मचारी घायल हो गए और खून बहने लगा। घटना के तुरंत बाद उन्होंने अपने साथियों को सूचित किया। ड्यूटी पूरी करने के बाद वे जबलपुर स्थित रेलवे अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें टीटी इंजेक्शन लगाया और मरहम-पट्टी की। इस घटना ने रेल महकमे में हड़कंप मचा दिया है और कर्मचारी व्यवस्था को लेकर बेहद आक्रोशित हैं। चूहों के इस हमले ने ट्रेन में सुरक्षा और स्वच्छता के दावों की पोल खोल दी है।
रेलवे के कर्मचारियों में भी आक्रोश
इस घटना से रेल कर्मचारियों में भारी गुस्सा है क्योंकि ट्रेन में चूहों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कर्मचारियों का कहना है कि ट्रेन में चूहों की भरमार है और वे केवल उन्हें ही नहीं बल्कि यात्रियों को भी परेशान कर रहे हैं। रेलवे प्रशासन द्वारा चूहों और काकरोचों की रोकथाम के लिए लाखों रुपये का ठेका दिया जाता है, लेकिन धरातल पर कोई सुधार दिखाई नहीं देता है। पावर कार में न तो चूहों को रोकने के लिए माउस पैड लगाए गए हैं और न ही पिंजरे की व्यवस्था की गई है। आए दिन चूहों के कारण सामान के नुकसान और कर्मचारियों की परेशानी की शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं पाया गया, तो भविष्य में कोई बड़ी घटना भी हो सकती है।
लापरवाही का खामियाजा भुगत रहे हैं मुसाफिर
रेलवे के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरी समस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं। यात्रियों के बैग और खाने के सामान को चूहे पहले ही नुकसान पहुंचाते रहे हैं, लेकिन अब कर्मचारियों पर हमले ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। टेक्नीशियन अनिल कुमार कुशवाहा के साथ हुई इस घटना ने साबित कर दिया है कि ट्रेन के कोच और पावर कार पूरी तरह से चूहों की चपेट में हैं। सफाई व्यवस्था और कीट नियंत्रण के नाम पर हो रहे खर्च पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए रेलवे को जल्द ही ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि ट्रेनों के भीतर चूहों के इस बढ़ते हुए खतरे को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।
