
जबलपुर। जबलपुर नगर निगम द्वारा शहर की नई सफाई व्यवस्था के लिए बुलाई गई निविदा में 35 कंपनियों ने भाग लिया है, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी विवादित कंपनी अल्ट्रा क्लीन एंड केयर सर्विसेज को शामिल करने से नया विवाद खड़ा हो गया है। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार के नेतृत्व में चल रही इस प्रक्रिया में दागी एजेंसी को मौका मिलने से नगर निगम की साख पर गहरे सवाल उठ रहे हैं। शहरवासी और विपक्षी दल अब इस फैसले के खिलाफ उग्र आंदोलन और हंगामे की तैयारी में जुट गए हैं। ई-प्रोक्योरमेंट प्रणाली के तहत दावा की जा रही पारदर्शिता पर इस कंपनी की एंट्री ने पानी फेर दिया है। यदि विरोध बढ़ा तो शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होगी।
निविदा प्रक्रिया में 35 प्रमुख कंपनियां शामिल हुईं
नगर निगम द्वारा बुलाई गई इस बड़ी टेंडर प्रक्रिया में देश भर की 35 नामचीन एजेंसियों ने अपने प्रस्ताव जमा किए हैं। इनमें माँ नर्मदा सफाई सहकारी कामगार एंड लेबर कांट्रेक्ट कोआपरेटिव सोसायटी, अधार सिक्योरिटी साल्यूशन प्रा.लि., ओमकारा सिक्योरिटी प्रा.लि., अल्ट्रा क्लीन एंड केयर सर्विसेज, आर. प्रियांशी कंस्ट्रक्शन एंड फेसेलिटि, अली टूर एंड ट्रेवल्स, आर.के. एंड कम्पनी मेन पावर प्रा.लि., माँ नर्मदा सांई सेवा समिति, महाराष्ट्र विकास ग्रुप कम्पनी, एच.एस. सर्विस प्रोवाइडर, थर्ड आई सिक्योरिटी सर्विस प्रा.लि., साल्यूशन फेसेलिटि सर्विसेस, सिंगू साल्यूशन प्रा.लि., सिंग इंटेलीजेंसी सिक्योरिटी प्रा.लि., मेसर्स शान सिक्योरिटी प्रा.लि., लक्ष्य सिक्योरिटी एंड मेन पावर सर्विस, कामथियन सिक्योरिटी सर्विस, हनुमान मेट्रिक्स सिक्योरिटी, स्काईबुल सिक्योरिटी सर्विस प्रा.लि., डिवाइन वेस्ट मैनेजमेंट एंड सर्विसेस, फ्रन्ट लाइन सिक्योरिटी एंड एलाईड सर्विसेस, अउरा एफ.एम.एस. प्रा.लि., सेंगर सिक्योरिटी एंड सर्विसेस प्रा.लि., फर्स्ट ग्लोबल सर्विसेस प्रा.लि. और टैक्सी जंक्शन जैसी फर्में शामिल हैं।
दागी कंपनी को क्लीन चिट पर उठे सवाल
अल्ट्रा क्लीन जैसी कई गंभीर भ्रष्टाचार के मामलों में आरोपित कंपनी को इस निविदा में शामिल किए जाने से नगर निगम की नीयत पर उंगलियां उठ रही हैं। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि नगर निगम प्रशासन ने बिना जांच पड़ताल किए ही इस दागदार फर्म को खुद ही क्लीन चिट दे दी है। ऐसे में पारदर्शी व्यवस्था का दावा अब पूरी तरह से संदेहास्पद नजर आ रहा है। नागरिकों और सामाजिक संगठनों में इस कदम को लेकर भारी नाराजगी है। बहुत जल्द इस मुद्दे पर तीखा विरोध प्रदर्शन और हंगामा होने के आसार बन रहे हैं। इस विवाद के कारण शहर में कचरा उठान और सफाई व्यवस्था चरमरा सकती है, जिससे जबलपुर के लोगों के लिए बेहद नकारात्मक परिस्थितियां पैदा होंगी।
पारदर्शी जांच की बात कह रहे जिम्मेदार अधिकारी
मामले पर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और निगमायुक्त रामप्रकाश अहिरवार का कहना है कि शहर के सभी वार्डों में घर-घर कचरा संग्रहण, मुख्य मार्गों की यांत्रिक सफाई, नाले-नालियों की सफाई और कचरे का त्वरित निस्तारण निगम की प्राथमिकता है। अधिकारियों के मुताबिक प्राप्त सभी 35 प्रस्तावों के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं का नियमों के तहत सूक्ष्म परीक्षण किया जाएगा। पात्र पाई जाने वाली एजेंसी को ही काम सौंपा जाएगा। हालांकि विवादित कंपनी की मौजूदगी से जनता का भरोसा डगमगा गया है।
