
मेडिकल यूनिवर्सिटी के विकेंद्रीकरण पर सवालों का दौर जारी
जबलपुर। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय को हिस्सों में बांटने की सरकारी कवायद पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मंच के प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक खंडेलवाल और रजिस्ट्रार डॉ. पुष्पराज सिंह बघेल से मुलाकात कर इस मामले में अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रशासन के माध्यम से अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को सौंपे गए ज्ञापन में तर्क दिया गया कि जब पहले से ही 5 क्षेत्रीय केंद्रों के माध्यम से पूरा काम सुचारू रूप से चल रहा है, तो फिर विश्वविद्यालय को विभाजित करने की आवश्यकता ही नहीं है। इस चर्चा के दौरान सामने आया कि इस नीतिगत विषय पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और न ही इसके लिए किसी समिति का गठन हुआ है। हालांकि, फाइल पर टिप्पणियां जरूर दर्ज की गई हैं।
विश्वविद्यालय को टुकड़ों में बांटने की योजना गलत
मौजूद जानकारों डॉ. पी.जी. नाजपांडे और रजत भार्गव ने स्पष्ट किया कि मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय अधिनियम 2013 के क्लॉज 8 में प्रदेश में 5 क्षेत्रीय समन्वय केंद्र गठित करने का ही स्पष्ट प्रावधान है। इन केंद्रों में भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर और रीवा शामिल हैं, जो अपने संबंधित संभागों का कार्यभार संभाल रहे हैं। जानकारों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में भोपाल के साथ नर्मदापुरम, ग्वालियर के साथ चंबल, इंदौर के साथ उज्जैन, जबलपुर के साथ सागर और रीवा के साथ शहडोल संभाग का जिम्मा है। कुलपति डॉ. अशोक खंडेलवाल ने इस मामले को पूरी तरह नीतिगत बताते हुए कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। इसी बीच नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर मंच के पदाधिकारियों ने कुलपति और रजिस्ट्रार को पुष्पगुच्छ भेंट कर उन्हें बधाई भी दी।
