सरकारी खजाना रह गया खाली, ठेकेदार और अफसर मिलकर मना रहे दीवाली

Newzo
Newzo - News Editor 69 Views
5 Min Read

आबकारी विभाग की नाक के नीचे चल रहा बिना सरकारी रिकॉर्ड का बड़ा खेल, उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश

जबलपुर। शराब की ओवररेटिंग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है जिसमें उपभोक्ताओं से तय कीमत से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं। इस पूरे खेल में रोजाना लाखों और महीने में करोड़ों रुपये की अवैध कमाई का अनुमान है जिसका कोई सरकारी रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा बेहद आम है कि जिला आबकारी विभाग की नाक के नीचे यह अवैध वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा है। इस पूरे मामले में बड़े शराब ठेकेदार के साथ जिला आबकारी अधिकारी का नाम प्रमुखता से चर्चाओं में आ रहे हैं। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार यदि प्रतिदिन हजारों बोतलों पर 10 से 50 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जाते हैं तो यह राशि करोड़ों में पहुंचती है। इस अतिरिक्त वसूली से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है क्योंकि यह पैसा सरकारी खातों में दर्ज नहीं हो पाता है।

​अवैध वसूली का पूरा पैसा सरकारी खजाने की जगह निजी खातों में जा रहा है

​शराब की दुकानों पर निर्धारित मूल्य यानी एमआरपी से अधिक राशि वसूलने की शिकायतें अब केवल आम उपभोक्ताओं की नाराजगी तक सीमित नहीं हैं। यह सीधे तौर पर सरकारी राजस्व और वित्तीय पारदर्शिता से जुड़ा एक बेहद गंभीर मुद्दा बन चुका है। सामान्य नियम के अनुसार ग्राहकों द्वारा दी गई राशि का एक निश्चित हिस्सा टैक्स और ड्यूटी के रूप में सरकारी खजाने में जाना चाहिए। जब दुकानों पर एमआरपी से अधिक वसूली की जाती है तो वह अतिरिक्त रकम सरकारी राजस्व का हिस्सा कभी नहीं बनती है। यही कारण है कि इस ओवररेटिंग को केवल उपभोक्ताओं का सामान्य शोषण नहीं बल्कि एक बहुत बड़ा वित्तीय घोटाला माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस प्रकार की अतिरिक्त वसूली हो रही है तो उसका पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।

​निगरानी में लापरवाही और मिलीभगत के आरोपों से आबकारी विभाग पर सवाल उठे

​पूरे जिले में शराब दुकानों की कड़ी निगरानी और नियमित औचक निरीक्षण करने की शत प्रतिशत जिम्मेदारी आबकारी विभाग की होती है। क्षेत्र से लगातार आ रही गंभीर शिकायतों के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई ठोस या प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही है जिससे विभागीय अधिकारियों की भूमिका पूरी तरह संदिग्ध हो जाती है। इस पूरे मामले में संबंधित बड़े ठेकेदार और जिले के शीर्ष आबकारी अधिकारियों के नाम लगातार सामने आ रहे हैं जिससे स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी ने इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और न ही संबंधित अधिकारियों का कोई विस्तृत पक्ष सामने आया है। इसके बावजूद स्थानीय जनता और सामाजिक कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर गहरा गुस्सा है।

​बिना रिकॉर्ड की नकद वसूली से व्यवस्था में काले धन का बड़ा स्रोत बनने की आशंका

​आर्थिक मामलों के जानकारों का स्पष्ट मानना है कि किसी भी क्षेत्र में बिना रिकॉर्ड के होने वाली नकद वसूली सीधे तौर पर काले धन को बढ़ावा देती है। इस पूरे मामले को एक बड़े अनअकाउंटेड मनी या गैर-दर्ज वित्तीय लेनदेन के रूप में देखा जा रहा है जो पूरी आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है। यदि प्रतिदिन जिले भर में 10000 से अधिक बोतलों की बिक्री के दौरान प्रति बोतल अतिरिक्त रकम वसूली जाए तो यह आंकड़ा बहुत बड़ा हो जाता है। वर्तमान में इस वित्तीय अनियमितता की कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है और न ही कोई प्रामाणिक वित्तीय आंकड़ा उपलब्ध कराया गया है। फिर भी इस पहलू को केवल सार्वजनिक चर्चाओं तक सीमित न रखकर एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच के दायरे में लाना बेहद जरूरी हो चुका है ताकि पूरा सच सामने आ सके।

Share This Article
error: This Content is protected !!