प्राध्यापक संघ की बैठक में फूटा गुस्सा, आर-पार के मूड में आए शिक्षक, भोपाल में जुटे प्रदेश भर के प्राध्यापक, सरकार को घेरा, आंदोलन की रूपरेखा तय

जबलपुर। भोपाल के शासकीय मोतीलाल विज्ञान महाविद्यालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ की साधारण सभा की बैठक संपन्न हुई। प्रांतीय अध्यक्ष आनंद शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के सरकारी कॉलेजों के शिक्षकों की कई ज्वलंत समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में संघ ने दो टूक शब्दों में निर्णय लिया कि यदि शासन ने 30 जून 2026 तक उनकी लंबित मांगों का निराकरण नहीं किया, तो प्रदेश भर के शिक्षक 1 जुलाई से चरणबद्ध तरीके से बड़ा आंदोलन शुरू कर देंगे। आंदोलन के पहले चरण में 15 जुलाई तक सभी शिक्षक काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। उच्च शिक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली को लेकर प्राध्यापकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बैठक में जबलपुर के सदस्य भी शामिल हुए संघ के संभागीय अध्यक्ष प्रोफेसर अरुण शुक्ला ने बताया कि इसमें विभिन्न मुद्दों पर ज्वलंत मुद्दों पर बात हुई जिन पर संघ बेहद गंभीरता से विचार किया गया।
लंबित पदोन्नति और समयमान वेतनमान पर आर-पार की लड़ाई
बैठक में वर्ष 2004 और 2005 में नियुक्त हुए बैकलॉग सहायक प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि को उनकी नियुक्ति तारीख से 2 वर्ष के भीतर समाप्त मानकर उन्हें कैरियर पदोन्नति का लाभ देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। इसके साथ ही, वर्ष 2017 में सेवा में आए सहायक प्राध्यापकों को भी समय पर कैरियर प्रोन्नति का लाभ देने की वकालत की गई। संघ ने इस बात पर भी चिंता जताई कि वर्ष 2003, 2011 और 2017 में परीक्षाओं के माध्यम से नियुक्त हुए शेष सहायक प्राध्यापकों की परिवीक्षा अवधि अब तक समाप्त नहीं की गई है, जिसे बिना किसी देरी के तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए।
क्रीड़ा अधिकारियों और ग्रंथपालों को शिक्षक के दर्जे की मांग
महाविद्यालयों में लंबे समय से सेवाएं दे रहे क्रीड़ा अधिकारियों और ग्रंथपालों के अधिकारों को लेकर भी बैठक में गंभीर मंथन हुआ। संघ ने मांग की है कि इन दोनों संवर्गों को भी शिक्षक का पदनाम दिया जाए और इसके साथ ही उन्हें पे-मैट्रिक्स 14 का पूरा लाभ दिया जावे। शिक्षकों का कहना है कि शैक्षणिक व्यवस्था को सुचारू बनाने में इनका महत्वपूर्ण योगदान है, इसलिए इनके साथ न्याय होना बेहद जरूरी है। इसके अतिरिक्त, सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों के सभी प्रकार के स्वत्वों और एरियर का भुगतान बिना किसी देरी के तुरंत करने की मांग को भी मजबूती से रखा गया है।
तीन महीने में परामर्शदात्री समिति की बैठक कराने की बाध्यता
नियमों की अनदेखी को लेकर प्राध्यापक संघ ने सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया। संघ के अनुसार, नियमानुसार हर तीन महीने में परामर्शदात्री समिति की बैठक आयोजित होना अनिवार्य है, लेकिन विभागीय निष्क्रियता के कारण ऐसा नहीं हो पा रहा है। संघ ने इस बैठक को तत्काल बुलाने की मांग की है। आंदोलन को सुचारू रूप से चलाने और आगामी रणनीति तैयार करने के लिए एक राज्य स्तरीय संघर्ष समिति बनाने का फैसला भी लिया गया है। शिक्षकों का साफ कहना है कि विभाग की सुस्ती के कारण ही वे सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं।
