​मप्र पावर जनरेटिंग कंपनी का बड़ा कदम, 2030 तक तैयार होंगी दो बड़ी बिजली इकाइयां

Newzo
Newzo - News Editor 53 Views
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जबलपुर। मध्यप्रदेश में भविष्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने उत्पादन क्षमता विस्तार का बड़ा फैसला लिया है। राज्य में लगातार बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों, खेती की जरूरत और घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की संख्या में इजाफे के कारण आने वाले समय में बिजली की मांग काफी बढ़ जाएगी। इसी मांग को निर्बाध रूप से पूरा करने के लिए कंपनी लगभग 23 हजार करोड़ रुपये के विशाल निवेश से 1320 मेगावाट की नई ऊर्जा क्षमता विकसित करने जा रही है। इस मास्टर प्लान के तहत अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई और सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी में 660-660 मेगावाट क्षमता की दो अत्याधुनिक अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल इकाइयां स्थापित की जाएंगी। ऊर्जा विभाग ने इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को वर्ष 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है ताकि राज्य ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।

​अत्याधुनिक तकनीक से ईंधन की बचत और पर्यावरण संरक्षण

​अमरकंटक और सतपुड़ा में लगने वाली नई इकाइयां पूरी तरह आधुनिक तकनीक पर काम करेंगी। पारंपरिक बिजली संयंत्रों के मुकाबले ये नई इकाइयां बहुत अधिक कार्यकुशल हैं। इस विशेष तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि इसमें कम कोयले का इस्तेमाल करके भी ज्यादा बिजली पैदा की जा सकेगी। ईंधन की खपत कम होने से सीधे तौर पर कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचेगा और बिजली उत्पादन की लागत भी काफी घट जाएगी। इन इकाइयों के चालू होने से राज्य को चौबीसों घंटे बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिलेगी।

​बुनियादी ढांचा मौजूद होने से आधी रह जाएगी निर्माण लागत

​सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में 660 मेगावाट की नई इकाई स्थापित करने में कंपनी को वित्तीय रूप से बड़ा फायदा मिलेगा। सारनी में बिजलीघर होने की वजह से वहां जमीन, पानी की सप्लाई और कोयला परिवहन जैसी जरूरी बुनियादी सुविधाएं पहले से ही तैयार हैं। नए सिरे से इन व्यवस्थाओं को बनाने में समय और पैसा बर्बाद नहीं होगा। इस वजह से सतपुड़ा परियोजना के विस्तार में बहुत कम लागत आएगी और भविष्य में यहां से मिलने वाली बिजली काफी किफायती साबित होगी।

​स्थानीय स्तर पर रोजगार और मजबूत होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था

​इस विशाल परियोजना के जमीन पर उतरने से केवल बिजली का उत्पादन ही नहीं बढ़ेगा बल्कि स्थानीय विकास को भी नई रफ्तार मिलेगी। संयंत्रों के निर्माण कार्य के दौरान आसपास के इलाकों में रहने वाले हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही परियोजना से जुड़े क्षेत्रों में सड़कों का जाल बिछेगा, परिवहन के साधन बढ़ेंगे और पानी की आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाएं बेहतर होंगी। इस भारी निवेश से स्थानीय बाजार और अर्थव्यवस्था को भारी मजबूती मिलेगी।

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