बोट ब्रो कंपनी का भंडाफोड़:सबूत मिटाने के लिए आरोपियों ने जानबूझकर किया नगद का लेनदेन,लिखित शिकायत के बाद कानून के शिकंजे में तीनों मुख्य आरोपी

जबलपुर। विजयनगर क्षेत्र में भरोसे का कत्ल करते हुए अपनों को ही कंगाल बनाने का एक बेहद शर्मनाक वाकया प्रकाश में आया है। यहाँ फिजियोथैरेपी सेंटर चलाने वाले शातिर अरविंद सोनी ने अपने दो अन्य मददगारों राजनंदन पटेल और संदीप बर्मन के साथ मिलकर सैकड़ों मासूम लोगों की जिंदगी भर की कमाई पर डाका डाला है। अरविंद सोनी प्रतिबंधित बोट ब्रो कंपनी का मुख्य सरगना बनकर घूम रहा था और उसने रातों-रात अमीर बनने का सब्जबाग दिखाकर अपने ही सगे-संबंधियों, मित्रों और पड़ोसियों से ऑनलाइन और नगद के रूप में लाखों रुपए हड़प लिए। रकम वापस करने के वक्त इन धोखेबाजों ने साफ तौर पर ठेंगा दिखा दिया। इस खुली लूट से त्रस्त होकर मुख्य फरियादी दशरथ राय और नितिन चौकसे ने अन्य पीड़ितों को एकजुट किया और पुलिस अधीक्षक दफ्तर पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इस मामले पर एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा ने दो टूक कहा है कि दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाएगा, जबकि घिर चुका आरोपी राजनंदन पटेल अब अपनी चमड़ी बचाने के लिए इसे शेयर मार्केट का घाटा बता रहा है।
शातिरों ने नगद वसूली कर चली बड़ी चाल
इन लुटेरों ने शिकार फंसाने के लिए बेहद घिनौना तरीका अपनाया। अरविंद सोनी ने पहले अपने फिजियोथैरेपी सेंटर के जरिए लोगों में पैठ बनाई और फिर राजनंदन पटेल तथा संदीप बर्मन के साथ मिलकर बोट ब्रो नाम की अवैध स्कीम में पैसे लगाने का दबाव बनाया। शुरुआत में जालसाजों ने मोटा लाभ देने का ढोंग रचा ताकि लोग अपनी जमा-पूंजी इनके पास उड़ेल दें। शातिरों ने सोची-समझी साजिश के तहत अधिकांश पैसा कैश में लिया ताकि कानून के हाथ उन तक न पहुंच सकें। जैसे ही सैकड़ों लोग कंगाल होने की कगार पर पहुंचे, इन तीनों ने कंपनी बंद होने का रोना रोकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
पीड़ितों का फूटा गुस्सा, अब नपेंगे गुनहगार
खून-पसीने की कमाई डूबने के बाद पीड़ितों का सब्र का बांध टूट गया है। फरियादी दशरथ राय और नितिन चौकसे की अगुवाई में भारी संख्या में ठगे गए लोग सीधे पुलिस कप्तान के दफ्तर पहुंचे और लिखित शिकायत सौंपकर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की। एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विजयनगर पुलिस को आरोपियों को दबोचने और गहन तफ्तीश के निर्देश जारी कर दिए हैं। वहीं दूसरी तरफ, कानून के फंदे से बचने के लिए आरोपी राजनंदन पटेल अब इस पूरे अपराध को स्वैच्छिक निवेश का नाम देकर गुमराह करने की नाकाम कोशिश में जुटा हुआ है।
