मेडिकल यूनिवर्सिटी के विभाजन पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं, भोपाल के अधिकारी ने बताई हकीकत

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Newzo - News Editor 47 Views
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जबलपुर। शहर की मेडिकल यूनिवर्सिटी के विभाजन पर मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने दूरभाष पर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पीजी नाजपांडे को बताया कि विभाजन पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है और इस विषय में ठोस प्रस्ताव आने पर ही विचार किया जाएगा। बातचीत के दौरान श्री नाजपांडे ने उन्हें स्थानीय जनता के आक्रोश से अवगत कराया। इसके बाद मंच के सदस्य रजत भार्गव, एडवोकेट वेदप्रकाश अघौलिया, डी.आर.लखेरा, मनीष शर्मा, सुशीला कनौजिया और गीता पांडे ने शासन के निर्देशानुसार एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर भेजने का निर्णय लिया है ताकि विश्वविद्यालय के विखंडन को रोका जा सके।

परिनियम के तहत पांच शहरों में क्षेत्रीय केंद्र बनाने की मांग

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के पदाधिकारियों ने विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन के लिए एक व्यावहारिक विकल्प सामने रखा है। मेडिकल यूनिवर्सिटी के परिनियम में प्रदेश के विभिन्न संभागों में क्षेत्रीय समन्वय केंद्र स्थापित करने का स्पष्ट प्रावधान है। इसके तहत भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, जबलपुर और रीवा में कुल 5 क्षेत्रीय समन्वय केंद्र बनाए जाने चाहिए। इससे प्रदेश भर के छात्रों को स्थानीय स्तर पर ही सुविधाएं मिल सकेंगी और मुख्य मुख्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। संगठन का मानना है कि इस कानूनी प्रावधान का पालन करते हुए क्षेत्रीय कार्यालयों का विस्तार हो, न कि मुख्य विश्वविद्यालय का विखंडन किया जाए।

अधिनियम के तहत मुख्यालय को जबलपुर में ही रखने की अनिवार्यता

संगठन ने इस बात पर विशेष जोर दिया है कि विश्वविद्यालय के मूल अधिनियम में इसका मुख्य प्रशासनिक कार्यालय जबलपुर शहर में ही स्थापित रखने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में इस कानूनी अधिनियम का उल्लंघन करके मुख्यालय को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने या इसके हिस्सों को बांटने का कोई भी प्रयास नियमों के विरुद्ध होगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जबलपुर के इस प्रतिष्ठित संस्थान की पहचान को बनाए रखना जरूरी है। जब अधिनियम में मुख्यालय की स्थिति तय है, तो प्रशासनिक स्तर पर इसके ढांचे में बदलाव का कोई औचित्य नहीं बनता।

शासन के निर्देश पर उपभोक्ता मंच द्वारा भेजा जाएगा विस्तृत प्रस्ताव

अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से मिले आश्वासन के बाद अब नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने अपनी आगामी रणनीति तय कर ली है। मंच के सभी वरिष्ठ सदस्य अब एक मजबूत और व्यापक प्रस्ताव तैयार करने में जुट गए हैं। इस प्रस्ताव में विश्वविद्यालय के विभाजन से होने वाले नुकसान और क्षेत्रीय केंद्रों के लाभों का पूरा ब्यौरा शामिल किया जाएगा। संगठन का उद्देश्य है कि शासन के समक्ष सभी कानूनी तथ्यों को सही तरीके से प्रस्तुत किया जाए। इस बातचीत के बाद समाधान की दिशा में एक नई उम्मीद जागी है।

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