
तिमाही के भीतर दूसरी बार बढ़े दाम, घरेलू रसोई के बजट पर सीधा असर,वैश्विक बाजार की बढ़ी लागत के कारण सरकारी तेल कंपनियों ने लिया बड़ा फैसला
भोपाल। मध्य प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए आज रविवार का दिन महंगाई का बड़ा झटका लेकर आया है। जबलपुर में अब घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की नई कीमत 919 रुपए निर्धारित कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने पूरे प्रदेश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दामों में 29 रुपए की सीधी बढ़ोतरी कर दी है, जिसके कारण प्रदेश के अलग-अलग शहरों में इसके दाम तेजी से बढ़ गए हैं। राजधानी भोपाल में अब 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत 918.50 रुपए से बढ़कर 947.50 रुपए हो गई है, जबकि इंदौर में उपभोक्ताओं को अब इसके लिए 970 रुपए देने होंगे। इसके अलावा ग्वालियर में एलपीजी सिलेंडर का रेट 1 हजार रुपए के पार चला गया है और उज्जैन में भी अब यह 1001 रुपए में मिलेगा।
महज 90 दिनों में 110 रुपए की भारी बढ़ोतरी
आम जनता के लिए परेशानी की बात यह है कि बीते तीन महीने के भीतर घरेलू गैस की कीमतों में यह दूसरा बड़ा इजाफा किया गया है। इससे पहले इसी साल 7 मार्च को एलपीजी सिलेंडर के दाम 60 रुपए बढ़ाए गए थे, जिसे मिलाकर अब 3 महीने के अंदर घरेलू सिलेंडर कुल 110 रुपए महंगा हो चुका है। इससे पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को भी घरेलू एलपीजी की कीमतों में 50 रुपए की बढ़ोतरी की थी। इसके साथ ही 1 मार्च 2026 को व्यावसायिक गैस सिलेंडर के दाम 31 रुपए बढ़ाए गए थे, जबकि 5 किलोग्राम वाले छोटे सिलेंडर की कीमत भी 11 रुपए बढ़ने से 821.50 रुपए पर पहुंच चुकी है।
घाटे की भरपाई के लिए तेल कंपनियों का फैसला
पेट्रोलियम कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की बढ़ती लागत और घरेलू बिक्री पर लगातार हो रहे नुकसान के कारण दामों को बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया था। आंतरिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बढ़ोतरी से पहले तक सरकारी तेल कंपनियों को हर घरेलू सिलेंडर की बिक्री पर करीब 703 रुपए का बड़ा घाटा उठाना पड़ रहा था। यही वजह है कि वर्तमान में की गई 29 रुपए की यह नई वृद्धि तेल कंपनियों के कुल वित्तीय नुकसान के मुकाबले महज एक आंशिक भरपाई ही है।
पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतें भी आसमान पर
रसोई गैस की इस मार से पहले पिछले कुछ हफ्तों के दौरान वाहन ईंधनों की कीमतों में भी लगातार तेजी देखी गई है। अकेले मई महीने की बात करें तो पेट्रोल और डीजल की कीमतें कुल मिलाकर 7.50 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं, जबकि सीएनजी भी करीब 6 रुपए प्रति किलो महंगी हुई है। कंपनियों का दावा है कि उन्हें अभी भी पेट्रोल पर करीब 11 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 33.6 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि वैश्विक बाजार की पूरी तेजी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला गया है और कंपनियां घाटा खुद सह रही हैं।
