जबलपुर। जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय में नियमों को ताक पर रखकर की गई असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. धारणा बिसेन की नियुक्ति के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। वर्तमान रजिस्ट्रार अश्विनी कुमार जैन ने एक कड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए पूर्व कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार बिसेन की बहू डॉ. धारणा बिसेन को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इस फर्जीवाड़े की जड़ें साल 2017 से जुड़ी हैं, जब गोंदिया के एक निजी संस्थान से नियमों के विपरीत वारासिवनी कृषि कॉलेज में प्रतिनियुक्ति पर लाया गया था। इस अवैध चयन प्रक्रिया में तत्कालीन रजिस्ट्रार अशोक कुमार इंगले भी मुख्य रूप से शामिल थे, जिसके कारण लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था। अब वर्तमान रजिस्ट्रार ने 7 पेज का विस्तृत आदेश जारी कर इस नियुक्ति को पूरी तरह अवैध घोषित करते हुए सेवा समाप्त कर दी है।
निजी संस्थान से सीधे सरकारी पद पर लाने का खेल
यह पूरा मामला साल 2017 में शुरू हुआ था जब नियमों को पूरी तरह दरकिनार करके श्रीमती धारणा बिसेन को महाराष्ट्र के गोंदिया स्थित एक निजी विश्वविद्यालय से सीधे वारासिवनी के सरकारी कृषि विश्वविद्यालय में प्रतिनियुक्ति पर बुला लिया गया था। इसके बाद बहुत ही गोपनीय तरीके से इस अस्थाई प्रतिनियुक्ति को स्थाई नौकरी में बदल दिया गया। इस पूरे प्रशासनिक खेल में केवल पूर्व कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार बिसेन ही जिम्मेदार नहीं थे बल्कि उनके साथ तत्कालीन रजिस्ट्रार अशोक कुमार इंगले ने भी मुख्य भूमिका निभाई थी। अशोक कुमार इंगले की लिखित सहमति और मिलीभगत के कारण ही इस अवैध नियुक्ति को अंतिम रूप दिया जा सका था। इसी वजह से जांच एजेंसियों ने पूर्व कुलपति के साथ-साथ तत्कालीन रजिस्ट्रार को भी इस भ्रष्टाचार के मामले में बराबर का आरोपी माना है।
लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू की एफआईआर के बाद अंतिम निर्णय
इस बड़ी धांधली की शिकायत जब लोकायुक्त संगठन के पास पहुंची तो प्राथमिक जांच में ही कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए। लोकायुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अवैध नियुक्ति देने वाले अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। इसके बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने भी इस पूरे प्रकरण में एफआईआर दर्ज कर अपनी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी थी। रसूखदारों के राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के कारण डॉ. धारणा बिसेन लंबे समय तक बालाघाट के वारासिवनी कृषि कॉलेज में बिना किसी बाधा के नौकरी करती रहीं। विश्वविद्यालय प्रशासन भी आंतरिक जांच समिति गठित करने से बचता रहा और लोकायुक्त जांच का बहाना बनाता रहा। अंततः वर्तमान रजिस्ट्रार अश्विनी कुमार जैन ने 7 पेज के आदेश में पूरी जांच और गड़बड़ियों का सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए आरोपी को सेवा से बाहर कर दिया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
रजिस्ट्रार डॉ. अश्वीनी कुमार जैन के अनुसार जांच में पाया गया कि श्रीमती धारणा बिसेन की नियुक्ति नियमों के विपरीत की गई है। उनके टर्मिनेशन का आदेश तत्काल प्रभाव से जारी कर दिया गया है और इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई भी तेजी से पूरी की जाएगी।
