
जबलपुर। मझौली क्षेत्र में स्थित अन्नपूर्णा और मुस्कान वेयरहाउस में 1 करोड़ 35 लाख रुपये से अधिक का सरकारी गेहूं उपार्जन घोटाला सामने आया है। कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच के बाद हटौली भूमि ग्राम संगठन केंद्र क्रमांक 1 पर कुल 48 हजार 3 सौ 47 क्विंटल गेहूं की सरकारी खरीदी के रिकॉर्ड खंगाले गए। भौतिक सत्यापन के दौरान वहां 5168 क्विंटल गेहूं की भारी शॉर्टेज यानी एक्स्ट्रा फीडिंग पाई गई। इस आर्थिक अनियमितता के मामले में जांच दल ने केंद्र प्रभारी रीना लोधी, ऑपरेटर मयूरी लोधी, शुभम बर्मन, अमन पाण्डेय, आकाश पाण्डेय, अनिल पटेल और नोडल अधिकारी आनंद भारसाकले समेत 7 लोगों को मुख्य आरोपी बनाया है। इस कार्रवाई में जिला आपूर्ति नियंत्रक और फ्लाइंग स्क्वाड के प्रभारी प्रमोद मिश्रा का नाम पूरी तरह से नदारद है। इस एकतरफा प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और मैदानी अमले ने पुख्ता दस्तावेजी प्रमाणों के साथ राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारियों और भोपाल मुख्यालय में अपनी शिकायत भेज दी है, जहां से बहुत जल्द ही बड़ी और कड़ी कार्रवाई किए जाने के संकेत मिले हैं।
डिजिटल डेटा में बड़ी हेरफेर करके लगाया सरकारी खजाने को चूना
जांच दल की विस्तृत रिपोर्ट में यह साफ हुआ है कि हटौली केंद्र पर ऑनलाइन पोर्टल का दुरुपयोग करके बड़े पैमाने पर फर्जी एंट्री की गई थी। गोदामों में वास्तव में जितना अनाज मौजूद था, उससे कई गुना अधिक मात्रा डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज कर दी गई। इस सोची-समझी हेरफेर की वजह से सरकारी खजाने को सीधे तौर पर करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा है। इसके साथ ही जांच में यह गंभीर तथ्य भी उजागर हुआ है कि खरीदी केंद्र के संचालन के दौरान बिना किसी सक्षम प्रशासनिक स्वीकृति के अनधिकृत और बाहरी व्यक्तियों को वहां लगातार प्रवेश दिया जा रहा था। इन तमाम गंभीर लापरवाहियों के बाद भी जिला स्तर पर उपार्जन नीति की निगरानी करने वाले खाद्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस पूरी जांच के दायरे से बाहर रखा गया है।
वरिष्ठ निगरानी तंत्र की लापरवाही पर पर्दा डालकर छोटे कर्मचारियों पर ठीकरा
इस बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े के उजागर होने के बाद अब केवल स्व सहायता समूह के पदाधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों जैसे निचले स्तर के कर्मचारियों पर ही पूरी जिम्मेदारी थोपकर दंडात्मक कार्रवाई की तैयारी चल रही है। सहकारिता और खाद्य विभाग के नियमों के अनुसार जिला स्तरीय फ्लाइंग स्क्वाड का यह अनिवार्य दायित्व है कि वह नियमित अंतराल पर उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण करे और अनाज के स्टॉक का भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करे। मझौली के दोनों वेयरहाउसों में महीनों तक यह अवैध खेल चलता रहा, लेकिन जिम्मेदार फ्लाइंग स्क्वाड ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। अब जब करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान सार्वजनिक हो चुका है, तब विभाग के शीर्ष नेतृत्व और मुख्य जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर पूरी तरह से मौन साध लिया गया है।
सत्ता के रसूख और पक्षपात के खिलाफ राजधानी में दस्तक से मचा हड़कंप
प्रशासनिक स्तर पर अपनाई जा रही इस दोहरी नीति के कारण मैदानी कर्मचारियों और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है। जमीनी हकीकत पर नजर रखने वाले जानकारों का स्पष्ट कहना है कि जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की मूक सहमति, लचर निगरानी या प्रशासनिक संरक्षण के बिना इतने बड़े पैमाने पर सरकारी अनाज का गायब होना पूरी तरह से असंभव है। आरोपियों को सत्ताधारी दल के एक बड़े नेता का संरक्षण मिलने की चर्चाओं के बीच अब इस मामले को पूरी तरह निष्पक्षता से जांचने की मांग उठ रही है। भोपाल मुख्यालय भेजी गई इस शिकायत के बाद शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है और कयास लगाए जा रहे हैं कि जल्द ही इस घोटाले में शामिल बड़े चेहरों पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
