डिजिटल ‘पुनर्जन्म’: सरकारी फाइलों में ब्लॉक हो चुके चेहरे अब कागजों पर भी हुए ‘जिंदा’

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Newzo - News Editor
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आधार कार्ड के अभाव में अधर में लटकी थी पढ़ाई, सुधरे दस्तावेज तो छात्राओं के चेहरे पर लौटी मुस्कान,तकनीकी सुधार के बाद सौंपे गए नए पहचान पत्र

जबलपुर। जिन छात्राओं को आधार कार्ड ब्लॉक या कैंसल हो जाने की वजह से पढ़ाई में परेशानी आ रही थी अब उनकी परेशानी दूर हो चुकी है, उन्हें अब उनका नया आधार उन्हें कार्ड सौंप दिया गया है। जिला प्रशासन की आधार सेवाओं से जुड़ी टीम के त्वरित तकनीकी हस्तक्षेप से जिले में पहचान पत्र की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे नागरिकों को बहुत बड़ी राहत मिली है। जिला प्रबंधक चित्रांशु त्रिपाठी के विशेष मार्गदर्शन में चलाए गए एक प्रभावी सुधार अभियान के माध्यम से बंद पड़े आधार को दोबारा सक्रिय कर दिया गया है। इस शासकीय मुहिम के अंतर्गत राजवी मिश्रा उम्र 12 वर्ष, चाहत कोल उम्र 16 वर्ष और अनिल कुमार यादव की उलझनों का स्थाई समाधान निकाला गया है। क्षेत्रीय कार्यालय यूआईडीएआई (UIDAI) से समन्वय कर तकनीकी खामियों या अन्य के कारण इन सभी के आधार पूरी तरह ब्लॉक हो गए थे, जिससे छात्राओं को छात्रवृत्ति मिलने, स्कूलों में दाखिला लेने और अन्य लोगों को जरूरी नागरिक सेवाओं का लाभ उठाने में पिछले कई सालों से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।

खुद की पहचान बन गयी थी चुनौती

शहर के विभिन्न क्षेत्रों में आधार के निरस्त हो जाने की वजह से आम लोगों को अपनी पहचान साबित करने में रोज नई चुनौतियों से गुजरना पड़ रहा था। विभागीय जानकारी के अनुसार कई मामलों में डेटा का सही मिलान न होने के कारण नागरिकों के जरूरी काम पिछले 3 से 5 साल से पूरी तरह ठप पड़े थे। पहचान का कोई वैध प्रमाण न होने के कारण नागरिकों को मिलने वाले बुनियादी लाभ और आवश्यक प्रशासनिक औपचारिकताएं बीच में ही अटक गई थीं, जिससे स्थानीय लोगों को मानसिक और व्यावहारिक रूप से परेशान होना पड़ रहा था।

​बायोमेट्रिक डेटा के इस्तेमाल से सुधरे दस्तावेज

​ इस खराबी का सबसे सीधा और प्रतिकूल असर क्षेत्र के छात्र-छात्राओं के भविष्य पर पड़ रहा था। शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और अन्य महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं के लिए वैध दस्तावेज अनिवार्य होने के कारण छात्र-छात्राओं को गंभीर प्रशासनिक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था। विशेष रूप से उन छात्राओं की पढ़ाई पर संकट आ गया था, जिनको मिलने वाली सरकारी छात्रवृत्ति दस्तावेजों की कमी से रुक गई थी। समय पर सही कागजात पेश न कर पाने की वजह से विद्यार्थियों का भविष्य पूरी तरह अधर में लटका हुआ था। आम जनता की इस परेशानी को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष कार्ययोजना तैयार की। जिन नागरिकों के पास पहचान साबित करने के लिए पुराने रिकॉर्ड मौजूद नहीं थे, उनकी पहचान स्थापित करने के लिए उंगलियों के निशान और अन्य बायोमेट्रिक डेटा का सहारा लिया गया। इस प्रामाणिक डेटा के आधार पर अन्य सहायक सरकारी दस्तावेजों को आपस में लिंक करके सुधार की प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया गया। इस अनूठे तकनीकी प्रयास से त्रुटियों को पूरी तरह दूर करके सभी प्रभावितों के वैध पहचान पत्र तैयार किए गए। विभाग के इस जनहितैषी कदम के बाद सभी नागरिकों के सुधरे हुए पहचान पत्र उन्हें सौंप दिए गए हैं। महत्वपूर्ण दस्तावेज वापस सक्रिय होने से अब विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का रास्ता साफ हो गया है और स्कूलों में आने वाली बाधाएं हमेशा के लिए समाप्त हो गई हैं। अब क्षेत्र के किसी भी नागरिक को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने या पहचान के सत्यापन के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इस सफल सुधार से आम जनता के सभी लंबित कार्य अब बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से पूरे हो सकेंगे।

छात्राओं को अब नहीं होगी परेशानी:त्रिपाठी

जिस वक्त यह छात्राएं हमारे पास आई थीं उसे समय वे बेहद निराश थीं। उनके पास आधार कार्ड नहीं था और वे जो भी संभव कोशिश थीं सभी कर चुकीं थीं । हमारी टीम ने पहले उनकी समस्या को समझा फिर यूआइडीएआइ के रीजनल ऑफिस से संपर्क किया, उनसे समन्वय किया और उनकी समस्याएं दूर किया।

चित्रांशु त्रिपाठी, जिला प्रबंधक,ई-गवर्नेंस

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