
जबलपुर। जिले की जनपद पंचायत मझौली के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत दर्शनी के सरपंच सुमित राय को सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में पद से हटा दिया गया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत जबलपुर द्वारा 5 जून को जारी आदेश के अनुसार, सरपंच सुमित राय ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करते हुए पंचायत के निर्माण कार्यों की राशि का भुगतान सीधे अपने पिता संतोष राय के नाम पर कर दिया। यह कार्रवाई मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 क ख के तहत की गई है, जिसमें उन्हें कर्तव्यों के निर्वहन में दुराचार का दोषी पाया गया। ग्राम दर्शनी निवासी शिकायतकर्ता मोहन झारिया की 5 फरवरी को की गई शिकायत के बाद कराई गई जांच में यह पूरा वित्तीय घोटाला सही साबित हुआ।
सरकारी राशि का सगे संबंधियों के खातों में अवैध हस्तांतरण
दर्शनी ग्राम पंचायत में वर्ष 2023 के दौरान रंगमंच और सामुदायिक भवन निर्माण का कार्य चल रहा था। शिकायतकर्ता मोहन झारिया ने आरोप लगाया था कि सरपंच सुमित राय ने नियमों को ताक पर रखकर पंचायत निधि से अपने पिता संतोष राय को क्रमशः 15000, 15000 और 20000 रुपये का भुगतान किया। इस प्रकार कुल 50000 रुपये की सरकारी राशि पंचायत दर्पण पोर्टल और लेखा अभिलेखों के माध्यम से पिता के खाते में ट्रांसफर की गई। जांच दल ने जब रिकॉर्ड खंगाले तो पाया कि सरपंच ने अपने पद का लाभ उठाकर जानबूझकर यह भुगतान अपने ही परिवार के सदस्य को किया, जो कि पंचायती राज व्यवस्था के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
त्रिस्तरीय जांच दल की पड़ताल में खुली वित्तीय अनियमितता की पोल
शिकायत मिलने के बाद जनपद पंचायत मझौली ने 9 मार्च को पत्र क्रमांक 507 के माध्यम से एक उच्च स्तरीय जांच दल का गठन किया था। इस जांच टीम में खंड पंचायत अधिकारी श्री भगवानदास साहू, उपयंत्री विजय प्रकाश यादव और एनआरएलएम के सहायक प्रबंधक सुधीर शुक्ला शामिल थे। इस प्रशासनिक टीम ने पंचायत के सभी वित्तीय दस्तावेजों और बैंक खातों की बारीकी से जांच की। जांच दल ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा कि सरपंच सुमित राय द्वारा अपने पिता संतोष राय को किया गया 50000 रुपये का भुगतान पूरी तरह नियम विरुद्ध था, जिसके बाद जांच प्रतिवेदन वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपा गया।
ईंट खरीदी के बदले पिता को भुगतान का तर्क
जांच के दौरान सरपंच सुमित राय ने अपना बचाव करते हुए बयान दिया कि निर्माण कार्य के लिए गुरुजी निवासी ईंट विक्रेता राम भैया चक्रवर्ती से 7000 और 3000 ईंटें खरीदी गई थीं। सरपंच का दावा था कि उनके पिता संतोष राय ने 18 जुलाई 2023 को 35000 रुपये और 2 नवंबर 2023 को 15000 रुपये का नकद भुगतान ईंट विक्रेता को किया था, जिसकी रसीदें भी मिली थीं। इसी वजह से यह राशि वापस पिता के खाते में डाली गई। हालांकि, जांच अधिकारियों ने इस दलील को खारिज कर दिया क्योंकि नियमों के तहत पंचायत का भुगतान सीधे वास्तविक वेंडर को होना चाहिए था, न कि सरपंच के पिता को।
