राज्यसभा चुनाव: भाजपा के दिग्गजों की गैरमौजूदगी ने बढ़ाया रोमांच, जारी है शह-मात का खेल

Newzo
Newzo - News Editor 91 Views
4 Min Read

अतिरिक्त नामांकन पत्रों की खरीद ने राजनीतिक विश्लेषकों को उलझाया, पुराने चेहरों के हटने से चुनावी मुकाबले का गणित पूरी तरह बदला, जनजातीय वर्ग के मतों को साधने के लिए नए चेहरों की तलाश तेज

जबलपुर। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की 3 सीटों को लेकर राजनीतिक हलचल बहुत ज्यादा तेज हो गई है। राज्य की 2 सीटों पर जीत का गणित बिल्कुल साफ होने के बाद असली मुकाबला 3वीं सीट के लिए शुरू हो गया है। बीजेपी ने अपने 2 घोषित उम्मीदवारों के अलावा 4 अतिरिक्त नामांकन फॉर्म खरीदकर सबको चौंका दिया है। कांग्रेस की तरफ से मीनाक्षी नटराजन को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद बीजेपी ने अपनी रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। राजनैतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि यदि कांग्रेस कमलनाथ या दिग्विजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारती तो स्थिति अलग होती। अब 8 जून को नामांकन की आखिरी तारीख तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है। राज्य का नेतृत्व अब दिल्ली मुख्यालय के अंतिम फैसले की प्रतीक्षा कर रहा है।

आदिवासी चेहरे पर दांव लगाने की गंभीर तैयारी

राज्य में जनजातीय वर्ग के वोटों के बड़े सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव को देखते हुए इस बात की पूरी संभावना है कि 3वीं सीट के लिए किसी प्रमुख आदिवासी नेता को आगे किया जा सकता है। इस फैसले से आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी पार्टी को सीधा बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी के शीर्ष रणनीतिकार इस वर्ग को साधने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं ताकि विपक्षी दल के पुराने और मजबूत vote बैंक में आसानी से सेंध लगाई जा सके। इसके लिए प्रदेश स्तर पर कई नामों की सूची तैयार करके केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जा चुकी है।

निर्दलीय उम्मीदवार को पीछे से समर्थन देने का प्लान

सियासी गलियारों में एक और चर्चा तेजी से फैल रही है कि बीजेपी सीधे अपना तीसरा उम्मीदवार उतारने के बजाय किसी रसूखदार निर्दलीय प्रत्याशी को मैदान में उतार सकती है। ऐसी स्थिति में उस उम्मीदवार को गुप्त रूप से पूरा समर्थन देकर चुनाव को बेहद दिलचस्प और त्रिकोणीय बनाया जा सकता है। इस योजना के जरिए विपक्षी खेमे के असंतुष्ट विधायकों के वोट हासिल करने की जुगत लगाई जा रही है। निर्दलीय प्रत्याशी के मैदान में आने से वोटिंग की नौबत आएगी जिससे चुनाव का रोमांच काफी बढ़ जाएगा।

विपक्ष के अंदरूनी असंतोष और क्रॉस वोटिंग पर नजर

मीनाक्षी नटराजन के नाम की घोषणा होने के बाद विपक्षी खेमे में कुछ गुटों के भीतर अंदरूनी नाराजगी की खबरें खुलकर सामने आ रही हैं। रणनीतिकार इस अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी का पूरा फायदा उठाने की फिराक में लगे हुए हैं। ऐसा माना जा रहा है कि मतदान के दिन क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को हवा देकर 3वीं सीट का पूरा समीकरण अपने पक्ष में मोड़ने का यह एक बहुत बड़ा और सुनहरा मौका बन सकता है। विरोधी दल के विधायकों से संपर्क साधने की कोशिशें भी भीतर ही भीतर शुरू हो चुकी हैं।

नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून तक सस्पेंस बरकरार

इस पूरी चुनावी उठापटक और नई राजनीतिक रणनीति का अंतिम रूप 8 जून को नामांकन की समय सीमा समाप्त होने के बाद ही जनता के सामने आ पाएगा। तब तक दोनों ही खेमे अपनी चालों को पूरी तरह गुप्त रख रहे हैं ताकि ऐन वक्त पर विरोधी को चौंकाया जा सके। 2 सीटों पर औपचारिकता पूरी होने के बावजूद असली रोमांच 3वीं सीट पर ही केंद्रित हो गया है। विधायकों की संख्या और समीकरणों को देखते हुए पल-पल में स्थितियां बदल रही हैं जिससे राजनीतिक विश्लेषक भी हैरान हैं।

Share This Article
error: This Content is protected !!