
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायधिपति मनिंदर सिंह भट्टी ने एमआर 4 लक्ष्मीपुर संजय नगर में चल रही तोड़फोड़ और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी स्थानीय निवासी का बिजली कनेक्शन काटा गया है, तो उसे तुरंत बहाल किया जाए। इस बहुचर्चित मामले में उस समय नया मोड़ आया जब अधिवक्ता रविंद्र कुमार गुप्ता ने लगभग 22 हस्तक्षेपकर्ता पट्टाधारी निवासियों की ओर से याचिका प्रस्तुत की। उन्होंने अदालत को बताया कि इन परिवारों को वर्ष 1998 में मध्य प्रदेश नगरीय क्षेत्र के भूमिहीन व्यक्ति अधिनियम 1984 के तहत 30 वर्ष के लिए विधिवत पट्टे प्रदान किए गए थे, जिनकी समयसीमा अभी समाप्त नहीं हुई है। करीब 400 परिवार वहां दशकों से निवास कर रहे हैं। इस मामले में केसरवानी शिक्षा समिति और जबलपुर विकास प्राधिकरण के बीच भूमि के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद के बीच यह न्यायिक हस्तक्षेप इन गरीब और पिछड़े वर्ग के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत बनकर सामने आया है।
हाईकोर्ट के आदेश से संजय नगर निवासियों को राहत
न्यायालय में सुनवाई के दौरान अधिवक्ता रविंद्र कुमार गुप्ता ने जोरदार तरीके से पक्ष रखते हुए न्यायधीश के संज्ञान में लाया कि संजय नगर में रह रहे लोग कोई अवैध अतिक्रमणकारी नहीं हैं, बल्कि उनके पास शासन द्वारा दिए गए वैध पट्टे मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधियों द्वारा इस क्षेत्र में करोड़ों रुपए खर्च करके सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित की गई हैं। पिछले 20 वर्षों से लगातार नगर निगम में टैक्स जमा किया जा रहा है और वैध बिजली कनेक्शन भी लिए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस 8 हेक्टेयर भूमि पर, जो मूल रूप से लक्ष्मीपुर तालाब के नाम से दर्ज थी और जिसे 1990 में जबलपुर विकास योजना के तहत आवासीय रूप में विकसित किया जाना था, ये लोग पट्टों के आधार पर मकान व झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। यहां रहने वाले अधिकांश परिवार पिछड़े एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग से ताल्लुक रखते हैं।
पट्टाधारियों ने शासन की योजनाओं का दिया विकल्प
सुनवाई के दौरान पट्टाधारी नागरिकों की ओर से यह भी प्रस्ताव रखा गया कि उन्हें बेघर करने के बजाय शासन की वर्तमान धारणाधिकार योजना के अंतर्गत पट्टे दिए जा सकते हैं या फिर ईडब्ल्यूएस के क्वार्टर बनाकर उपलब्ध कराए जाएं। इसके एवज में सभी निवासी निर्धारित राशि का भुगतान करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस बात पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया कि नगर निगम और विकास प्राधिकरण दोनों ही इस जमीन पर अपना अधिकार जता रहे हैं और नागरिकों को हटाने में सहयोग कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि इन निवासियों के पास 1998 के वैध कानूनी दस्तावेज और पट्टे मौजूद हैं। उच्च न्यायालय ने इन सभी तथ्यों और तर्कों पर गंभीरता से विचार करते हुए अगली सुनवाई तक तोड़फोड़ की कार्रवाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
अदालत में याचिका दायर करने वाले सभी नागरिकों के नाम
इस बहुचर्चित मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के समक्ष पट्टाधारियों और स्थानीय निवासियों की तरफ से विधिवत आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें प्रमुख रूप से आरती कुशवाहा, बहादुर पुत्र संतोष लाल, सुरेश कुमार गुप्ता, सम्राट कविलकर, राम आसरे पटेल, लक्ष्मी पटेल, सोने नंबर लाल पुत्र कोदू लाल, भोले राम पटेल, मीना कुशवाहा, लखन लाल पुत्र सुनु पटेल, राजा राम, चमरू लाल, गुरु चरण, सुनाई, भूरा, सोणिलाल गोटिया, गोलू कोल पुत्र दुर्गा प्रसाद, शोभना सोंथिया, प्रीति पटेल, रवि पटेल और रमेश पटेल पुत्र कोठारी पटेल शामिल हैं। इन सभी हस्तक्षेपकर्ताओं के प्रयासों और मजबूत कानूनी पैरवी के चलते ही माननीय न्यायालय द्वारा बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाई गई है और यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी परिवार को असामयिक रूप से परेशान न किया जाए और कटी हुई बिजली तुरंत जोड़ी जाए।
