
जबलपुर। जिले की सिहोरा जनपद पंचायत के अधीन आने वाली ग्राम पंचायत बुधारी की महिला सरपंच रितु राजेश पांडे इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था से हताश हैं. यह वही सरपंच हैं जिनके उत्कृष्ट कार्यों की प्रशंसा स्वयं जिला कलेक्टर ने सोशल मीडिया पर की थी. अब रितु राजेश पांडे ने सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर पंचायत सचिव पुरुषोत्तम यादव के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है. सचिव पर 2 लाख रुपये की भवन निर्माण योजना का लाभ अपात्र व्यक्ति को देने और वित्तीय अनियमितता के आरोप सिद्ध हो चुके हैं. इस मामले में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने सचिव को 2 फरवरी 2025 को निलंबित कर दिया था. लेकिन 7 अप्रैल 2026 को उसी दागी सचिव को वापस बुधारी पंचायत में पदस्थ कर दिया गया, जिससे पंचायत का कामकाज और पारदर्शिता प्रभावित हो रही है.
निलंबन के बाद उसी पंचायत में हुई दोबारा पदस्थापना
ग्राम पंचायत बुधारी में पदस्थ सचिव पुरुषोत्तम यादव को जब जांच में दोषी पाया गया था, तब उन पर सख्त कार्रवाई की गई थी. जिला पंचायत सीईओ ने उन्हें पद से हटा दिया था. निलंबन की यह कार्रवाई प्रमाणित भ्रष्टाचार के आधार पर हुई थी. लेकिन प्रशासन ने 7 अप्रैल 2026 को एक आदेश जारी करके उन्हें फिर से उसी कुर्सी पर बैठा दिया. एक दागी अधिकारी को उसी जगह वापस भेजने के इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीण भी इस बात से हैरान हैं कि जिस अधिकारी ने पंचायत के पैसों का दुरुपयोग किया, उसे उसी गांव की जिम्मेदारी फिर से कैसे सौंप दी गई.
जिला पंचायत सीईओ से नहीं मिली कोई भी मदद
सचिव की दोबारा वापसी से परेशान होकर सरपंच रितु राजेश पांडे ने सबसे पहले जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी से संपर्क किया. उन्होंने अपनी शिकायत में स्पष्ट रूप से बताया कि दागी सचिव के आने से पंचायत के विकास कार्य बाधित होंगे. सरपंच ने उच्च अधिकारियों को स्थिति की गंभीरता समझाने का प्रयास किया. इसके बावजूद जिला पंचायत कार्यालय से उन्हें कोई भी संतोषजनक जवाब या मदद नहीं मिली. प्रशासन की इस अनदेखी के कारण महिला सरपंच को न्याय के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है और वे खुद को प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार मान रही हैं.
नियम विरुद्ध बहाली से पंचायत में खत्म हो रही पारदर्शिता
पंचायत राज व्यवस्था में ईमानदारी सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. महिला सरपंच का स्पष्ट रूप से कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित व्यक्ति की उसी स्थान पर वापसी से व्यवस्था पर लोगों का भरोसा टूटता है. सामान्य प्रशासन विभाग के नियमों के अनुसार भी ऐसे अधिकारियों को उसी स्थान पर पदस्थ करने से बचा जाना चाहिए. सरपंच ने अपनी शिकायत में इस बात पर जोर दिया है कि सचिव के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए पंचायत का वित्तीय प्रबंधन खतरे में है. उनके रवैये के कारण गांव के वास्तविक और पात्र हितग्राही योजनाओं के लाभ से वंचित रह सकते हैं.
कलेक्टर से भ्रष्ट सचिव के तत्काल तबादले की मांग
हर तरफ से निराशा मिलने के बाद अब सरपंच ने सीधे जिले के मुखिया यानी कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है. उन्होंने अपनी लिखित शिकायत में मांग की है कि सचिव पुरुषोत्तम यादव का तबादला तुरंत किसी अन्य स्थान पर किया जाए. सरपंच का मानना है कि जब तक यह सचिव पंचायत में रहेगा, तब तक गांव का स्वतंत्र और निष्पक्ष विकास संभव नहीं है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कलेक्टर अपनी उस सरपंच की शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं, जिसके काम की उन्होंने खुद कभी खुलकर सराहना की थी.
