फर्जी फ्रेंचाइजी का मायाजाल: सोशल मीडिया पर विज्ञापन देख जबलपुर की महिला उद्यमी से सवा लाख की धोखाधड़ी

Newzo
Newzo - News Editor 58 Views
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जबलपुर। शहर में ऑनलाइन ठगी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां थाना विजयनगर क्षेत्र में रहने वाली एक महिला कारोबारी डिजिटल विज्ञापन के जाल में फंसकर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार हो गई हैं। दीक्षितपुरा क्षेत्र में अपने पति के साथ टू-व्हीलर सर्विस सेंटर का संचालन करने वाली पुरानी जगदम्बा कॉलोनी निवासी 36 वर्षीय श्रीमती पूजा दुबे ने व्यापार को नया विस्तार देने की योजना बनाई थी। इसी सिलसिले में उन्होंने इंस्टाग्राम पर बेंगलुरु की वॉल्मों पासनियर टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी का एक आकर्षक विज्ञापन देखा, जिसमें आकर्षक शर्तों पर फ्रेंचाइजी देने का बड़ा दावा किया गया था। इस भ्रामक विज्ञापन के प्रभाव में आकर पीड़िता ने 28 अप्रैल 2026 को इंटरनेट के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन जमा कर दिया। इसके तत्काल बाद कथित कंपनी के प्रतिनिधि के रूप में शिवांकर जैन, सिद्धार्थ और पुनीत जैन नामक तीन व्यक्तियों ने पीड़िता से मोबाइल फोन पर संपर्क साधा और व्यावसायिक औपचारिकताएं पूरी करने के नाम पर अलग-अलग किश्तों में कुल 1 लाख 34 हजार 400 रुपये ट्रांसफर करवा लिए। ठगे जाने का अहसास होने पर जब पीड़िता ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, तो विजयनगर थाना पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर तीनों नामजद जालसाजों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत आपराधिक मुकदमा पंजीकृत कर विस्तृत कानूनी तफ्तीश शुरू कर दी है।

​डिजिटल विज्ञापन के जरिए बुना गया ठगी का ताना-बाना

​पीड़िता श्रीमती पूजा दुबे ने जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फ्रेंचाइजी आवंटन का विज्ञापन देखा, तो उन्हें यह अपने वर्तमान व्यवसाय को बढ़ाने का एक बेहतर अवसर लगा। जैसे ही उन्होंने वेबसाइट पर जाकर अपनी व्यक्तिगत और व्यावसायिक जानकारी दर्ज की, बेंगलुरु की इस कथित कंपनी के सक्रिय गिरोह ने जाल बुनना शुरू कर दिया। शिवांकर जैन, सिद्धार्थ और पुनीत जैन ने खुद को कंपनी का वरिष्ठ अधिकारी बताते हुए पीड़िता का भरोसा जीता। उन्होंने सबसे पहले एक कागजी औपचारिकता के तहत पंजीकरण फॉर्म भरवाया और उसे बेंगलुरु स्थित अपने कार्यालय के पते पर ईमेल के जरिए मंगाया। इस प्रक्रिया के पूरे होते ही आरोपियों ने असली खेल शुरू किया और पीड़िता को जल्द से जल्द फ्रेंचाइजी आवंटित करने का झांसा देकर पैसों की मांग शुरू कर दी।

​कोटक, आईडीबीआई और यूनियन बैंक से हुआ डिजिटल भुगतान

​व्यापार शुरू करने की जल्दबाजी में पीड़िता आरोपियों की हर बात को सच मानती चली गईं। सबसे पहले 2 मई 2026 को उन्होंने अपने कोटक महिंद्रा बैंक खाते से पंजीकरण शुल्क के तौर पर 15,200 रुपये आरोपियों के खाते में ऑनलाइन भेज दिए। इसके बाद शातिरों ने एक फर्जी दस्तावेज भेजकर यह दावा किया कि उनका आवेदन स्वीकृत हो चुका है और अब नियमानुसार सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी। इस पर भरोसा करते हुए पीड़िता ने 4 मई को अपने आईडीबीआई बैंक खाते से 40,000 रुपये भेजे और अगले ही दिन यानी 5 मई को अपने यूनियन बैंक खाते का उपयोग करके 58,800 रुपये की अतिरिक्त राशि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी।

​ट्रांसपोर्टेशन खर्च और टोल टैक्स के नाम पर भी ऐंठे रुपये

​सुरक्षा निधि के रूप में एक बड़ी रकम हड़पने के बाद भी शातिर अपराधियों का लालच कम नहीं हुआ। उन्होंने पीड़िता को झांसा दिया कि फ्रेंचाइजी से संबंधित आवश्यक सामग्री और मशीनरी बेंगलुरु मुख्यालय से जबलपुर भेजी जा रही है, जिसके परिवहन और रास्ते में लगने वाले टोल टैक्स का खर्च उन्हें ही उठाना होगा। इस नए बहाने के तहत जालसाजों ने 20,400 रुपये की और मांग की। व्यापार ठप न हो और सामान समय पर पहुंच जाए, इसलिए पीड़िता ने बिना कोई संदेह किए यह राशि भी अपने आईडीबीआई बैंक खाते से उनके बताए खाते में ट्रांसफर कर दी।

​एनओसी के नाम पर फिर मंगे पैसे, संपर्क टूटने पर मामला दर्ज

​वित्तीय शोषण का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका; अगले दिन आरोपियों ने जबलपुर में व्यवसाय संचालन के लिए अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी जारी कराने के एवज में 5,950 रुपये और भेजने का दबाव बनाया। लगातार हो रही पैसों की मांग और सामान की डिलीवरी में देरी के कारण आखिरकार पीड़िता को बड़ी गड़बड़ी का आभास हुआ। उन्होंने आरोपियों को स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि अब वे कोई भी अतिरिक्त भुगतान सामान सुरक्षित रूप से जबलपुर पहुंचने के बाद ही करेंगी। इसके बाद 8 मई 2026 की शाम से सभी आरोपियों ने पीड़िता के फोन कॉल्स का जवाब देना बंद कर दिया और अपने नंबर बंद कर लिए। खुद को बड़ी ठगी का शिकार पाकर पीड़िता ने तुरंत विजयनगर थाने में पूरी घटनाक्रम की लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 319(2) और 308(1) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है और अब बैंक खातों की डिटेल व मोबाइल लोकेशन के जरिए जालसाजों की तलाश की जा रही है।

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