​ई-रिक्शा पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, सरकार को नोटिस

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Newzo - News Editor 81 Views
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जबलपुर। जबलपुर में ई-रिक्शा की अनियंत्रित संख्या ने शहर की यातायात व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में खुलासा किया गया कि केवल जबलपुर में ही 9000 से अधिक ई-रिक्शा बिना किसी परमिट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे शहर में आए दिन जाम और दुर्घटनाएं हो रही हैं। अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि वर्ष 2018 में मिली छूट का फायदा उठाकर बड़ी संख्या में बिना लाइसेंस और नाबालिग चालक भी वाहन चला रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को स्पष्ट जवाब पेश करने का आखिरी मौका दिया है और छूट वापस लेने पर विचार करने के निर्देश दिए हैं।

शहर की सड़कों पर ई-रिक्शा की अराजकता

​याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 66 के तहत दी गई छूट का गलत इस्तेमाल हो रहा है। ई-रिक्शा संचालकों द्वारा मनमानी किए जाने के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट में भारत सरकार के असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई के दौरान उपस्थित होकर जवाब देने के लिए समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने उन्हें 4 सप्ताह की अंतिम मोहलत दी है। कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि क्या ई-रिक्शा को दी गई यह रियायत वापस नहीं ली जा सकती। अब सरकारी जवाब के बाद ही तय होगा कि ई-रिक्शा के संचालन के लिए कड़े नियम लागू होंगे या नहीं।

बिना परमिट चलने वालों पर कार्रवाई की मांग

​अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने कोर्ट को बताया कि वर्तमान में ई-रिक्शा के लिए किसी भी तरह का परमिट न होने के कारण इनका नियमन करना मुश्किल हो गया है। बिना लाइसेंस वाले और नाबालिग चालकों के सड़क पर उतरने से हादसों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। याचिका में मांग की गई है कि सरकार को इस दिशा में अविलंब संशोधन करने चाहिए ताकि शहरों में यातायात का दबाव कम हो सके और सुरक्षा मानकों का पालन हो सके। सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले आगामी जवाब पर शहरवासियों की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि कोर्ट का यह रुख ई-रिक्शा के भविष्य और शहर की परिवहन व्यवस्था में बड़े बदलाव का कारण बन सकता है।

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