
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की ओर से दायर की गई याचिका को डिवीजन बैंच ने किया खारिज
जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने बीना विधानसभा क्षेत्र की विधायक निर्मला सप्रे के दल-बदल के मामले में विधानसभा अध्यक्ष को कोई भी निर्देश जारी करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले की सुनवाई पहले से ही विधानसभा अध्यक्ष के पास चल रही है, इसलिए इसमें अदालत के हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बैंच ने इस संबंध में दायर याचिका को खारिज कर दिया है।
डिवीजन बैंच ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दल-बदल कानून के तहत दायर किए गए आवेदन पर नियमित रूप से सुनवाई की जा रही है। इस मामले से जुड़े सभी संबंधित पक्षों के बयान भी दर्ज किए जा चुके हैं। ऐसी स्थिति को देखते हुए उच्च न्यायालय को इस प्रक्रिया में दखल देने की कोई जरूरत महसूस नहीं होती। कोर्ट ने पहले इस मामले की पूरी सुनवाई करने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था, जिसे गुरुवार को सुनाया गया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार की ओर से हाई कोर्ट में यह याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि निर्मला सप्रे बीना विधानसभा सीट से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर विधायक चुनी गई थीं। आरोप है कि 5 मई 2024 को राहतगढ़ में आयोजित मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की एक सार्वजनिक सभा में शामिल होकर निर्मला सप्रे भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुकी हैं। इसके बावजूद उन्होंने अब तक अपने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है। इस मामले को लेकर 30 जून 2024 को विधानसभा अध्यक्ष के सामने एक दल-बदल याचिका दायर की गई थी, जिस पर समय पर निर्णय न होने की बात कहते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था।
