
जबलपुर। जबलपुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 67 में गौर पुलिस चौकी के पीछे स्थित नगर निगम का सामुदायिक भवन भूमाफियाओं के निशाने पर है। नागरिकों की सुविधा और मांग को ध्यान में रखकर बनाए गए इस भवन का उपयोग सामाजिक व पारिवारिक आयोजनों के लिए होना था। परंतु नगर निगम और जिला प्रशासन की अनदेखी से यह स्थान धीरे-धीरे खंडहर बन चुका है। इसी बदहाली का लाभ उठाकर अब वहां लकड़ी टाल संचालक ने कब्जा जमा लिया है और बड़े पैमाने पर व्यापार चला रहा है। भूमाफियाओं का दुस्साहस इतना बढ़ गया है कि उन्होंने समीप बने श्मशान घाट की जमीन को भी घेर लिया है। शुक्रवार शाम वन विभाग की टीम ने केवल औपचारिक कार्रवाई की।
लापरवाही से खंडहर बना सरकारी सामुदायिक भवन
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि जिस मकसद से नगर निगम द्वारा इस सामुदायिक भवन का निर्माण कराया गया था, वह पूरी तरह समाप्त हो चुका है। उचित रखरखाव और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण यह परिसर पूरी तरह बदहाल हो गया। खाली पड़ी शासकीय भूमि को देखकर असामाजिक तत्वों और भूमाफियाओं ने यहां अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। भवन के आसपास की खाली जमीन पर अवैध रूप से लकड़ी का भारी स्टॉक रखा जा रहा है। रहवासियों को आशंका है कि यदि समय रहते प्रशासनिक अमले ने कठोर कदम नहीं उठाए, तो माफिया जल्द ही मुख्य भवन पर भी पूरी तरह काबिज हो जाएंगे। लगातार दी जा रही शिकायतों के बाद भी प्रशासनिक अमला मौन साधकर बैठा है। इसके कारण क्षेत्र में अवैध कब्जे का दायरा लगातार फैलता जा रहा है।
कार्रवाई के नाम पर की गई सिर्फ खानापूर्ति
क्षेत्र की स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि माफिया ने अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित श्मशान घाट की जमीन पर भी अपना हक जमा लिया है। शुक्रवार शाम को गौर पुलिस चौकी के ठीक सामने अवैध लकड़ी कारोबार पर वन विभाग की टीम ने दबिश दी थी। उस दौरान वन विभाग ने एक अवैध आरा मशीन और कुछ लकड़ियां जप्त करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली। हैरानी की बात यह रही कि ठीक पीछे सामुदायिक भवन परिसर में रखी लाखों रुपए की लकड़ी पर टीम की नजर तक नहीं पड़ी। इसे लेकर रहवासियों में भारी असंतोष है। नागरिकों का कहना है कि जिम्मेदार महकमों की सुस्ती के कारण सार्वजनिक संपत्तियां एक-एक कर माफिया के हाथों में जा रही हैं।
