
जबलपुर। दिल्ली के सिविल लाइंस स्थित अरुणा आसफ अली अस्पताल में तैनात 35 वर्षीय एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉक्टर सिमरप्रीत सिंह आनंद ने अपनी जान दे दी। लुधियाना निवासी डॉ. सिमरप्रीत ने ड्यूटी के दौरान खुद को एनेस्थीसिया की घातक दवा का इंजेक्शन लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे मेडिकल जगत को स्तब्ध कर दिया है, क्योंकि घटनास्थल से मिले 3 पेज के सुसाइड नोट में जबलपुर की एक महिला डॉक्टर के साथ उनके प्रेम संबंध और पारिवारिक विवाद का खुलासा हुआ है। मृतक डॉक्टर ने नोट में लिखा है कि अंतरजातीय विवाह के लिए परिवार की रजामंदी न मिलने के कारण वे गहरे मानसिक तनाव में थे। इस मामले में जबलपुर से जुड़े तार सामने आने के बाद हर तरफ चर्चाओं का बाजार गर्म है। पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है।
अंतरजातीय विवाह की बाधा बनी मौत का कारण
डॉ. सिमरप्रीत सिंह और जबलपुर की मूल निवासी महिला डॉक्टर पिछले 2 वर्षों से अरुणा आसफ अली अस्पताल में साथ काम कर रहे थे। दोनों एक-दूसरे से प्रेम करते थे और शादी के बंधन में बंधना चाहते थे। हालांकि, उनके परिवारों ने अलग-अलग जाति होने के कारण इस रिश्ते को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था। सुसाइड नोट में मृतक डॉक्टर ने स्पष्ट किया है कि वे इस मानसिक दबाव को झेल नहीं पा रहे थे। उन्होंने यह भी लिखा कि उनकी मौत के लिए किसी अन्य व्यक्ति को जिम्मेदार न ठहराया जाए और उनकी निजी चीजें उनकी प्रेमिका को सौंप दी जाएं। घटना के समय उन्होंने नाइट ड्यूटी के दौरान पहले अपने तकनीकी सहायक से हाथ में कैनुला लगवाया और बाद में खुद को जानलेवा इंजेक्शन देकर जीवन लीला समाप्त कर ली।
तकनीकी दक्षता बनी खुद की जान का सौदा
एक एनेस्थीसिया विशेषज्ञ होने के नाते डॉ. सिमरप्रीत को भली-भांति ज्ञात था कि शरीर में किस दवा की कितनी मात्रा सीधे मौत का कारण बनती है। ड्यूटी के दौरान वे अपने रूम में गए और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। अगली सुबह जब उन्होंने कमरा नहीं खोला, तो स्टाफ ने दरवाजा तोड़ा और उन्हें मृत पाया। मौके पर इस्तेमाल की गई सिरिंज और खाली दवा की शीशियां बरामद की गई हैं। फिलहाल जबलपुर की रहने वाली महिला डॉक्टर की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पुलिस अभी मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सभी पहलुओं की जांच कर रही है और मृत डॉक्टर के परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है।
