डिंडौरी: पदोन्नति सूची में धांधली से भड़के वनकर्मी, विधायक ने मुख्यमंत्री तक मामला ले जाने का दिया आश्वासन

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Newzo - News Editor 65 Views
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डिंडौरी। जिले में वन विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया में भारी अनियमितता सामने आने के बाद वनकर्मियों का गुस्सा फूट पड़ा है। शुक्रवार को प्रभावित वनकर्मियों का एक समूह शहपुरा के भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे के आवास पर पहुंचा और उन्हें पूरी वस्तुस्थिति से अवगत कराया। वनरक्षक ज्योति सरोज धुर्वे ने आरोप लगाया कि 13 जुलाई 2026 को जारी की गई पदोन्नति सूची में विभागीय नियमों और वरिष्ठता को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। इस प्रक्रिया में हुई गड़बड़ी के कारण जिले के 75 वनकर्मियों का प्रमोशन अटक गया है। विधायक ने इसे गंभीर मामला मानते हुए मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव के समक्ष रखने का आश्वासन दिया है। जरूरत पड़ने पर वे विधानसभा के आगामी सत्र में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव भी लाएंगे।

​वरिष्ठता को दरकिनार कर कनिष्ठों को दिया प्रमोशन

​वनकर्मियों का आरोप है कि पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक 1 अप्रैल 2025 की वरिष्ठता सूची के आधार पर आयोजित होनी चाहिए थी, लेकिन अधिकारियों ने मनमानी की। वर्ष 1999 से 2008 के बीच भर्ती हुए अनुभवी फील्ड वनरक्षकों को पदोन्नति से वंचित कर दिया गया, जबकि उनके बाद भर्ती हुए और कार्यालयों में पदस्थ कनिष्ठ कर्मियों को प्रोन्नति का लाभ दे दिया गया। इस भेदभाव से फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। 11 साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही यह पदोन्नति प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने कहा कि 11 साल बाद मिल रहे हक को इस तरह आर्थिक दंड के नाम पर रोकना पूरी तरह अनुचित है और वे पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

​बिना नोटिस वेतन कटौती से बढ़ा आक्रोश

​विभागीय अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने वसूली की अवधि को मनमाने तरीके से 1 जनवरी से बढ़ाकर जुलाई 2026 तक कर दिया, जिससे कई वरिष्ठ कर्मचारी पात्रता की दौड़ से बाहर हो गए। सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर है कि कर्मचारियों को वसूली के संबंध में कोई पूर्व सूचना या नोटिस नहीं दिया गया। विभाग ने सीधे कर्मचारियों के वेतन से 140 रुपये से लेकर 200 रुपये तक की कटौती कर ली। नियम के मुताबिक वसूली की अवधि दिसंबर 2025 तक ही मान्य होनी चाहिए थी, लेकिन उसे आगे बढ़ाकर जानबूझकर वरिष्ठ कर्मियों को अयोग्य घोषित करने की साजिश रची गई। वनकर्मियों ने मांग की है कि इस पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति सूची को पुन: संशोधित किया जाए।

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