डिंडौरी जिला उद्योग केंद्र की भारी चूक, राइस मिल संचालक की ईमानदारी से बचे शासन के 2.64 करोड़ रुपये

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Newzo - News Editor 11 Views
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एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के तहत निर्धारित राशि से दस गुना अधिक राशि सीधे हितग्राही के खाते में हुई ट्रांसफर

डिंडौरी। मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले डिंडौरी में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ एमएसएमई प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत हितग्राही मेसर्स नर्मदा राइस मिल इकाई कोहका को मिलने वाली 29 लाख 34 हजार 722 रुपये की सब्सिडी के बदले तकनीकी त्रुटि से सीधे 2 करोड़ 93 लाख 47 हजार 223 रुपये खाते में ट्रांसफर कर दिए गए। इतनी बड़ी राशि देखकर राइस मिल की प्रोपराइटर रिचा राजपाल और उनके पति रमेश राजपाल ने अनुकरणीय ईमानदारी का परिचय दिया। उन्होंने तत्काल इसकी जानकारी बैंक और उद्योग विभाग के अधिकारियों को लिखित पत्र देकर दी। इस सतर्कता से शासन के 2 करोड़ 64 लाख 12 हजार 500 रुपये सुरक्षित वापस मिल गए हैं। मामले से डिंडौरी से लेकर भोपाल तक हड़कंप मच गया है। महाप्रबंधक राधिका कुसरे ने बताया कि हेड ऑफिस स्तर पर हुई तकनीकी गड़बड़ी के कारण यह राशि ट्रांसफर हुई थी।

हितग्राही की सजगता से बची शासन की भारी-भरकम राशि

इस पूरे मामले में सबसे सराहनीय भूमिका कोहका स्थित नर्मदा राइस मिल की संचालक रिचा राजपाल की रही। जैसे ही उन्हें अपने बैंक खाते में निर्धारित राशि से करीब दस गुना अधिक यानी 2 करोड़ 93 लाख 47 हजार 223 रुपये जमा होने का संदेश मिला, वे चौंक गईं। उन्होंने बिना किसी लालच के तुरंत अपने पति रमेश राजपाल को इसकी सूचना दी। दोनों ने मिलकर बिना समय गंवाए उद्योग विभाग के स्थानीय अधिकारियों और बैंक प्रबंधन से संपर्क साधा। रिचा राजपाल ने विभाग को एक औपचारिक लिखित आवेदन सौंपकर पूरी स्थिति स्पष्ट की और अतिरिक्त सरकारी पैसे को वापस लेने के लिए शासन का अधिकृत बैंक खाता नंबर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उनकी इस त्वरित प्रतिक्रिया के कारण ही सरकार के खाते से बाहर गई 2 करोड़ 64 लाख 12 हजार 500 रुपये की अतिरिक्त राशि समय रहते वापस सरकारी खजाने में जमा कराई जा सकी। उद्योग विभाग के अधिकारी भी राइस मिल संचालक दंपत्ति की इस ईमानदारी और राष्ट्रभक्ति की खुले दिल से प्रशंसा कर रहे हैं।

मुख्यालय स्तर की तकनीकी खामी ने खड़ी की बड़ी मुश्किल

जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र डिंडौरी के तहत स्वीकृत इस सब्सिडी भुगतान में हुई इतनी बड़ी गड़बड़ी ने सरकारी सिस्टम की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जिला उद्योग केंद्र की महाप्रबंधक राधिका कुसरे ने मामले की प्रारंभिक जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि मेसर्स नर्मदा राइस मिल के नाम पर सिर्फ 29 लाख 34 हजार 722 रुपये की सब्सिडी ही स्वीकृत की गई थी। लेकिन भोपाल स्थित मुख्य कार्यालय या हेड ऑफिस के स्तर पर भुगतान प्रक्रिया के दौरान कोई गंभीर तकनीकी या विभागीय त्रुटि हो गई। इस डिजिटल खामी के चलते तय राशि के आगे अंकों का फेरबदल हो गया और हितग्राही के खाते में सीधे करोड़ों रुपये हस्तांतरित हो गए। यदि यह मामला किसी ऐसे व्यक्ति के खाते से जुड़ा होता जो इतनी ईमानदारी नहीं दिखाता, तो शासन को करोड़ों रुपये का सीधा और बड़ा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता था।

प्रक्रिया में सुधार और व्यापक जांच के कड़े निर्देश

करोड़ों रुपये के इस गलत ट्रांजैक्शन की घटना के बाद अब विभागीय अधिकारियों ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र ने इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों द्वारा इस बात की गहन पड़ताल की जा रही है कि हेड ऑफिस के स्तर पर आखिर किस अधिकारी या कर्मचारी के स्तर पर यह चूक हुई। विभाग ने भविष्य में इस प्रकार की तकनीकी गलतियों को रोकने और भुगतान प्रणाली में पूरी पारदर्शिता लाने के लिए सख्त सुधारात्मक कदम उठाने का निर्णय लिया है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भुगतान से पहले डेटा का उचित सत्यापन और बहुस्तरीय जांच की प्रक्रिया का कड़ाई से पालन किया गया होता, तो इतनी बड़ी मानवीय या तकनीकी भूल को आसानी से टाला जा सकता था। फिलहाल अतिरिक्त राशि को वापस शासन के खाते में सुरक्षित रूप से जमा करा दिया गया है और आगे की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने की तैयारी की जा रही है।

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