भोपाल से छूटा ऐसा तीर, 253 पुलिस वालों के छूटने लगे पसीने!

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Newzo - News Editor 14 Views
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मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में सेवा रिकॉर्ड खंगालने की कवायद शुरू, 25 जून 2026 तक सौंपें पूरी रिपोर्ट

जबलपुर। मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल ने प्रशासनिक कसावट और समयमान वेतनमान स्वीकृति की प्रक्रिया के तहत प्रदेशभर में विभिन्न जिलों और विशेष इकाइयों में पदस्थ 253 निरीक्षकों एवं समकक्ष संवर्ग के अधिकारियों का पूरा सेवा रिकॉर्ड तत्काल प्रभाव से तलब किया है। सहायक पुलिस महानिरीक्षक प्रशासन द्वारा जारी इस विशेष सरकारी आदेश के अनुसार सभी पुलिस इकाइयों को 25 जून 2026 तक यह महत्वपूर्ण जानकारी अनिवार्य रूप से मुख्यालय उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। इस प्रक्रिया में मुख्य रूप से जबलपुर क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय और 6वीं वाहिनी एसएएफ में पदस्थ नवल कुमार आर्य, विपिन बिहारी सिंह, शैलेश कुमार मिश्रा, उमेश प्रताप सिंह, कन्हैया सिंह बघेल, धनीराम बड़गरे, प्रमोद कुमार शुक्ला, पंकज सिंह, विजय सिंह मेहरा, सुशील सिंह बागड़ी, हितेश फुलझेले, जयप्रकाश आर्य और रितेश साहू सहित कई अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं ताकि उनके सेवा रिकॉर्ड की पूरी समीक्षा की जा सके।

​लंबित विभागीय जांच और आपराधिक मामलों का पूरा विवरण मांगा गया

पुलिस विभाग द्वारा जारी इस विशेष आधिकारिक पत्र में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए हैं कि सूची में शामिल सभी 253 निरीक्षकों के खिलाफ यदि वर्तमान में कोई विभागीय जांच, आपराधिक प्रकरण या कोई पुराना दंड प्रभावशील है तो उसकी बिंदुवार जानकारी दी जाए। सभी संबंधित विभागों और जिला प्रभारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे इन मामलों से जुड़े आरोप पत्र और दंडादेश की प्रमाणित प्रतियां निर्धारित प्रपत्र में भरकर मुख्यालय भेजें। इसके साथ ही साइबर सेल, विशेष शाखा, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, रेडियो संगठन, एससीआरबी और विभिन्न जिलों में तैनात सभी समकक्ष श्रेणी के अधिकारियों की वर्तमान ड्यूटी स्थिति की पूरी गोपनीय रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

​सामान्य और नियमित प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा:मुख्यालय

पुलिस मुख्यालय ने इस बड़ी कार्रवाई को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ करते हुए स्पष्ट किया है कि यह केवल एक सामान्य और नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। इस पत्र में किसी भी अधिकारी के विरुद्ध सीधे तौर पर किसी नई जांच की शुरुआत करने या उन पर किसी तरह का कोई दोषारोपण होने जैसी कोई बात नहीं है। विभाग केवल यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यदि किसी निरीक्षक के विरुद्ध कोई पुराना मामला काफी समय से लंबित है या कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है तो उसका पूरा विवरण सही समय पर मुख्यालय के पास उपलब्ध रहे ताकि वेतनमान निर्धारण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

​निर्धारित फॉर्मेट भेजी जाएगी जानकारी

मुख्यालय ने अपनी सभी अधीनस्थ इकाइयों और जिला प्रभारियों को अत्यंत कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे इस पूरी जानकारी को निर्धारित प्रारूप में बहुत सावधानीपूर्वक तैयार कर ईमेल अथवा विशेष वाहक के माध्यम से हर हाल में 25 जून 2026 तक भोपाल भेजें। इस समय सीमा का सख्ती से पालन करने को कहा गया है ताकि सेवा अभिलेखों के सत्यापन और समयमान वेतनमान स्वीकृति की प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के तय समय पर पूरा किया जा सके। इस महत्वपूर्ण आदेश के बाद से ही राज्य की सभी पुलिस इकाइयों में संबंधित निरीक्षकों के पुराने रिकॉर्ड खंगालने और उनकी विस्तृत सूची तैयार करने का काम मैदानी स्तर पर बहुत तेजी से शुरू कर दिया गया है।

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