डीईओ की लापरवाही:कर्ज़ लेकर घर चला रहे गुरुजी

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Newzo - News Editor 154 Views
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जबलपुर। वित्तीय कुव्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही के कारण अनुदान प्राप्त शालाओं के कुल 155 शिक्षक पिछले 3 महीने से वेतन नहीं मिलने के कारण भारी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। जबलपुर सहित पूरे मध्यप्रदेश में लोक शिक्षण संचालनालय की देरी और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा समय पर भौतिक सत्यापन रिपोर्ट नहीं भेजने के कारण 12.34 करोड़ रुपये का कुल बजट अटका हुआ है। स्थिति यह है कि जबलपुर के 155, ग्वालियर के 93, इंदौर के 79 और मुरैना के 76 शिक्षक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। मप्र माध्यमिक शिक्षक संघ ने इस गंभीर मामले को लेकर कमिश्नर डीपीआई को ज्ञापन सौंपा है जिसके बाद कमिश्नर ने दोषी जिला शिक्षा अधिकारी को 7 दिन के भीतर स्पष्ट रिपोर्ट पेश करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

​अधिकारियों की सुस्ती से शिक्षकों का बजट बिगड़ा

​प्रदेशभर में अनुदान प्राप्त शालाओं की संख्या कुल 600 है जहाँ हर साल सरकार द्वारा बजट जारी किया जाता है। लोक शिक्षण संचालनालय स्कूलों की माँग के आधार पर राशि का वितरण करता है। इस प्रक्रिया के तहत हर साल भौतिक सत्यापन कराना अनिवार्य होता है ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। सत्र 2026-27 के लिए भी निर्देश जारी किए गए थे लेकिन जिला स्तर पर अधिकारियों ने समयानुसार रिपोर्ट नहीं भेजी। मई महीने में मिले बजट से केवल मार्च और अप्रैल का वेतन ही बाँटा जा सका था। मई और जून का वेतन अभी तक शिक्षकों के खातों में नहीं पहुँच पाया है जबकि जुलाई का महीना भी बीतने की कगार पर है।

सूदखोरों के चंगुल में फंसने की मजबूरी

​समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण शिक्षकों को घर चलाने के लिए पाई-पाई का मोहताज होना पड़ रहा है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि गुरुजी लोगों को अपने परिवार का पेट पालने के लिए बाजार से महँगे ब्याज पर कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। सबसे बुरी स्थिति जबलपुर और आसपास के जिलों के शिक्षकों की है जहाँ भुखमरी जैसे हालात बन चुके हैं। प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी और सुस्ती का खामियाजा निर्दोष शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है जो किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​कमिश्नर के आदेश के बाद मचा प्रशासनिक हड़कंप

​शिक्षकों की इस दयनीय स्थिति को देखते हुए मप्र माध्यमिक शिक्षक संघ ने आक्रामक रुख अपना लिया है। संघ के पदाधिकारियों ने कमिश्नर डीपीआई से मुलाकात कर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है जिसमें दोषी अधिकारियों के खिलाफ तत्काल प्रभाव से अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की माँग की गई है। ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए कमिश्नर ने संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी को मात्र 7 दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद से महकमे में हड़कंप मच गया है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही रुका हुआ बजट जारी होने से शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी।

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