बच्चों के हाथ में लगा एक बेहद खतरनाक हथियार, राहगीरों और चालकों की सुरक्षा अब दांव पर लगी, अपराधियों के लिए नया जरिया बना यह ऐप

जबलपुर। शहर में इन दिनों युवाओं के मोबाइल में एक नया BAT नाम का ऐप तेजी से फैल रहा है, जो शहर के ई-रिक्शा चालकों के लिए जानलेवा मुसीबत बन गया है। यह खतरनाक तकनीक सड़क पर दौड़ते ई-रिक्शा की बैटरी को महज चंद सेकंड में रिमोट की तरह अपने कंट्रोल में ले लेती है, जिससे रिक्शा अचानक कहीं भी बंद या चालू हो सकता है। युवाओं के बीच यह ऐप मनोरंजन का जरिया बन गया है, लेकिन इसके गंभीर दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। इस ऐप के जरिए मनमाने ढंग से ई-रिक्शा रोकने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, जिससे आम जनता और चालकों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। स्थानीय पुलिस तक इसकी शिकायतें पहुंची हैं, लेकिन तकनीकी खिलौने के रूप में वायरल हो रहे इस ऐप पर प्रभावी लगाम अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
अचानक रुक रहे रिक्शा,फैल रहा डर
शहर की व्यस्त सड़कों पर दौड़ते ई-रिक्शा अक्सर अचानक थम रहे हैं, जिसके पीछे इसी BAT ऐप का हाथ बताया जा रहा है। जब कोई ई-रिक्शा चालक सड़क पर अपनी सवारी के साथ तेजी से गुजर रहा होता है, तब पास खड़े युवा इस ऐप के जरिए उसकी बैटरी को ट्रिगर कर देते हैं। इससे बिजली की सप्लाई अचानक बाधित हो जाती है और रिक्शा चलते-चलते बीच सड़क पर ही जाम हो जाता है। इस स्थिति में पीछे से आ रहे भारी वाहनों के टकराने का खतरा हर पल बना रहता है। कई बार इसे मजाक में किया जा रहा है, लेकिन यह मज़ाक किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना में बदल सकता है, जहाँ जान-माल की भारी हानि होने की पूरी आशंका बनी हुई है।
आपराधिक गतिविधियों का बढ़ रहा खतरा
इस ऐप का दुरुपयोग केवल शरारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गंभीर अपराधों को न्योता देने का काम भी कर रहा है। अपराधी किस्म के लोग सुनसान रास्तों पर इस तकनीक का इस्तेमाल करके ई-रिक्शा को अपनी इच्छा अनुसार जगह पर रुकवा सकते हैं। एक बार रिक्शा रुकने के बाद लूटपाट या अन्य आपराधिक घटनाओं को अंजाम देना बहुत आसान हो जाता है। पुलिस प्रशासन के लिए यह एक नई तरह की तकनीकी चुनौती है, क्योंकि अपराधी इसका इस्तेमाल करके चालक को असहाय बना देते हैं। शहर में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं को देखते हुए ई-रिक्शा का इस तरह कंट्रोल होना सुरक्षा के लिहाज से बहुत ही चिंताजनक और डरावना विषय बनता जा रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसे खतरनाक ऐप को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डाउनलोड के लिए क्यों उपलब्ध कराया जा रहा है। बच्चों और युवाओं के हाथ में यह एक खिलौने जैसा लग चुका है, जिसका उपयोग वे बिना सोचे-समझे दूसरों को परेशान करने में कर रहे हैं। हालांकि जबलपुर पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई शुरू करने का दावा किया है, लेकिन अभी तक धरातल पर इसका कोई ठोस असर दिखाई नहीं दे रहा है। जब तक ऐप स्टोर पर ऐसे एप्स की उपलब्धता बनी रहेगी, तब तक किसी भी बड़ी अनहोनी को रोकना नामुमकिन है। तकनीकी कंपनियों को भी अपने प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा मानकों को कड़ा करना होगा ताकि किसी की जान से खिलवाड़ न हो सके।
