सरकारी मीटरों की हेराफेरी पर कंपनी का कड़ा एक्शन, अवैध बिजली कनेक्शन देने वालों पर कड़ी कानूनी नजर

जबलपुर। शहर में बिजली कंपनी ने अपने ही विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। कंपनी ने बिना कनेक्शन राशि जमा किए अनाधिकृत रूप से मीटर लगाने के आरोप में अपने तीन आउटसोर्स कर्मचारियों राहुल पटेल, अमर लोधी और दीपक अहिरवार के खिलाफ रांझी थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। अधीक्षण अभियंता संजय अरोरा ने बताया कि विभाग ने इन कर्मचारियों को पहले ही कार्य से बेदखल कर दिया था। गौरतलब है कि एक महीने पहले विभाग ने दिलीप कोष्ठा और कुतुबुद्दीन नामक दो बाहरी व्यक्तियों पर भी मीटर से छेड़छाड़ के मामले में एफआईआर कराई थी। इस कार्रवाई के क्रम में विभाग ने 17 मीटर रीडरों का तबादला किया है और लाइन कर्मचारी भगवान सिंह तथा कनिष्ठ अभियंता संजीत यादव को निलंबित कर दिया है।
कम्पनी की इंटरनल जांच में हुआ खुलासा
कंपनी की आंतरिक जांच में सामने आया कि रांझी जोन में कुछ कर्मचारी विभाग के आधिकारिक मीटरों को बिना अनुमति गायब कर ग्राहकों के घरों में अवैध रूप से लगा रहे थे। यह सीधे तौर पर राजस्व की चोरी का मामला है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में भी किसी भी प्रकार की कंपनी विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर अधिकारियों और कर्मचारियों पर इसी तरह कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी। विभाग के इस निर्णय से भ्रष्ट तत्वों में हड़कंप मच गया है।
भ्रष्टाचार में संलिप्त अफसरों पर गिरेगी गाज
अधीक्षण अभियंता ने बताया कि शहर संभाग उत्तर के अंतर्गत रांझी जोन में चल रही संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही थी। जांच के दौरान पाया गया कि विभाग की कार्यप्रणाली को दरकिनार कर कुछ लोग व्यक्तिगत लाभ के लिए सरकारी संपत्तियों का दुरुपयोग कर रहे थे। विभाग की इस जीरो टॉलरेंस नीति के तहत न केवल इन तीन कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज कराया गया है, बल्कि उनके साथ मिलीभगत रखने वाले अन्य अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है। आने वाले दिनों में जांच का दायरा बढ़ाते हुए कई और लोगों को निलंबित या कार्यमुक्त किया जा सकता है। यह कार्रवाई उन सभी के लिए चेतावनी है जो बिजली कंपनी के राजस्व को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। कंपनी उपभोक्ताओं से अपील करती है कि वे हमेशा आधिकारिक प्रक्रिया के माध्यम से ही नए कनेक्शन लें और किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी सीधे उच्च अधिकारियों को दें।
