पानी की किल्लत पर मोहन सरकार सख्त, अमले की छुट्टियां निरस्त

Newzo
Newzo - News Editor
5 Min Read

कलेक्टर्स संभालेंगे कमान,जिलों में बनेंगे पेयजल कंट्रोल रूम,पानी के टैंकरों पर रहेगी पैनी नजर, लापरवाही करने वालों पर होगी सख्ती

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 24 मई को प्रदेश में पेयजल व्यवस्था की प्रतिदिन मॉनीटरिंग और समस्याओं के त्वरित निराकरण के कड़े निर्देश जारी किए हैं। इसी तारतम्य में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से कलेक्टर्स, नगरीय निकाय, पंचायत और पीएचई विभाग के अधिकारियों की एक अहम बैठक ली। बैठक में पेयजल आपूर्ति से जुड़े सभी विभागों के मैदानी अमले के अवकाश पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है, ताकि आगामी दिनों में आमजन को पानी की किल्लत न हो। मुख्य सचिव ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि वे जिलों में सेंट्रल कंट्रोल रूम स्थापित कर इसकी खुद कप्तानी करें और जनप्रतिनिधियों से समन्वय बनाकर हर क्षेत्र में टैंकरों तथा अन्य माध्यमों से पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाएं।

​टैंकरों की सख्त मॉनीटरिंग,बिजली कनेक्शन न काटने के निर्देश

​मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कलेक्टर्स को निर्देशित किया कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पानी के टैंकरों के वितरण की सख्त निगरानी की जाए, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता या टैंकरों का दुरुपयोग न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहरी क्षेत्रों की पानी की टंकियों को समान रूप से भरा जाए और इस पूरे प्लान में ऊर्जा विभाग को भी अनिवार्य रूप से शामिल रखा जाए। शासन ने सख्त हिदायत दी है कि पेयजल संकट के इस दौर में किसी भी नलजल योजना का विद्युत कनेक्शन नहीं काटा जाना चाहिए। पेयजल प्रदाय को युद्ध स्तर पर सुचारू रखने के लिए राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में बोरवेल खनन के लिए 1500 करोड़ रुपये और पंचायतों को संधारण कार्यों के लिए 55 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की है, जिससे पैसों की कमी के कारण पानी की सप्लाई प्रभावित न हो।

​समस्याओं का तय समय में समाधान, कलेक्टर्स करेंगे रोज समीक्षा

​प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि लोक सेवा गारंटी और सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से मिलने वाली पानी संबंधी शिकायतों का न्यूनतम समय में निपटारा किया जाए। कलेक्टर्स को आगामी एक महीने का विशेष प्लान बनाकर रोज इसकी समीक्षा करनी होगी। बैठक में साफ किया गया कि हर बसाहट तक पानी पहुंचाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, इसके लिए जरूरत पड़ने पर ट्रीटेड वॉटर का भी समुचित उपयोग किया जाए। अधिकारियों को नए नियमों की जानकारी देते हुए बताया गया कि नई एसओपी और रिवाइज्ड एसओआर के तहत अब जल संधारण के 10 हजार रुपये तक के कार्य पंचायतें अपने स्तर पर स्वयं करा सकती हैं। इसके अलावा पेयजल व्यवस्था के लिए 15वें व 16वें वित्त आयोग की राशि तथा पंचायतों की स्वयं की आय के स्रोतों का भी उपयोग किया जा सकता है।

​जल स्रोतों पर विशेष सतर्कता बरती जाएगी

​अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने कलेक्टर्स को पेयजल के सभी मौजूदा स्रोतों पर कड़ी नजर रखने और पानी कम होने की स्थिति में पहले से ही वैकल्पिक जल स्रोतों का इंतजाम रखने को कहा है। बैठक में अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने जानकारी दी कि 25 और 26 मई को प्रदेश में दो दिवसीय गंगा दशहरा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उज्जैन में क्षिप्रा तट के कार्यक्रमों में शामिल होंगे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन को पेयजल संरक्षण से जोड़कर जनोपयोगी बनाया जाए, जिससे आम जनता में पानी की बचत और जल स्रोतों को सहेजने के प्रति जागरूकता पैदा हो सके। इस बैठक में नगरीय विकास, पंचायत, पीएचई, ऊर्जा और सामान्य प्रशासन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

Share This Article