भोपाल-देवास फोरलेन: फास्टैग से अधिक टोल वसूली पर 11 करोड़ लौटाने का आदेश

Newzo
Newzo - News Editor 85 Views
2 Min Read

हाई कोर्ट ने कंपनी पर लगाया जुर्माना

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए भोपाल-देवास फोरलेन पर फास्टैग के जरिए वाहन मालिकों से की गई अधिक टोल वसूली को अवैध करार दिया है। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की बेंच ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों से वसूल की गई 11 करोड़ रुपए की राशि वापस करे। इसके अलावा, गलत तरीके से वसूली करने के लिए कंपनी पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है, जिसे मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करना अनिवार्य है।

सॉफ्टवेयर की गलत मैपिंग बनी विवाद की वजह

​यह पूरा मामला मेसर्स देवास-भोपाल कॉरिडोर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। कंपनी ने मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें अधिक राशि लौटाने के लिए कहा गया था। कंपनी का तर्क था कि फास्टैग सिस्टम में तीन एक्सल वाली बसों को मल्टी एक्सल माना गया, जिसके कारण तकनीकी खामी की वजह से अधिक टोल कट गया। कंपनी ने इसके लिए खुद को जिम्मेदार नहीं माना था।

अदालत ने तकनीकी बहाने को खारिज किया

​सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि तकनीक का उद्देश्य सुविधा प्रदान करना है, न कि अनुबंध की शर्तों को बदलना। अदालत ने पाया कि समझौते के तहत तीन एक्सल बसों को मल्टी एक्सल ट्रक मानने का कोई प्रावधान नहीं था। बसों के लिए टोल की दरें पहले से ही निर्धारित थीं। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि सॉफ्टवेयर में गलत मैपिंग हुई है, तो उसकी पूरी जवाबदेही टोल कंपनी की है। समझौते की शर्तों का उल्लंघन कर वसूली गई राशि को लौटाना अनिवार्य है, और कंपनी को अब इस निर्देश का पालन करना ही होगा।

Share This Article
error: This Content is protected !!