बार काउंसिल का बड़ा फैसला:चुनाव लड़ रहे पूर्व न्यायिक अधिकारी नरेंद्र जैन की वकालत पर आजीवन रोक

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Newzo - News Editor 207 Views
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​जबलपुर/ नई दिल्ली। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने मध्य प्रदेश के पूर्व न्यायिक अधिकारी और इंदौर के चर्चित अधिवक्ता नरेंद्र कुमार जैन को पेशेवर कदाचार का गंभीर दोषी ठहराते हुए उनकी वकालत की प्रैक्टिस पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है। बीसीआई ने अपने कड़े आदेश में स्पष्ट किया कि जैन द्वारा लगातार न्यायाधीशों और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ निराधार आरोप लगाए गए, जिससे न्यायपालिका और विधि पेशे की गरिमा को भारी क्षति पहुँची है। समिति ने उनके नाम को मध्य प्रदेश राज्य बार काउंसिल की आधिकारिक अधिवक्ताओं की सूची से तुरंत प्रभाव से हटाने का सख्त निर्देश भी जारी कर दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि नरेंद्र कुमार जैन इस समय मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल का महत्वपूर्ण चुनाव भी लड़ रहे हैं और अब तक सामने आई मतगणना में वह चौथे स्थान पर चल रहे हैं।

​न्यायपालिका पर मनगढ़ंत लांछन लगाने वाले पूर्व जज पर गिरी बीसीआई की गाज

​बीसीआई की अनुशासनात्मक समिति ने अपने विस्तृत आदेश में कहा कि न्यायिक फैसलों की तथ्यों के आधार पर की गई स्वस्थ आलोचना पूरी तरह स्वीकार्य होती है, लेकिन बिना किसी विश्वसनीय साक्ष्य के सीधे न्यायाधीशों और प्रमुख संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार गंभीर आरोप लगाना पेशेवर आचरण के बिल्कुल विपरीत है। आदेश में इस बात का भी विशेष उल्लेख किया गया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पहले तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रवि मालिमथ के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों के मामले में नरेंद्र जैन को अदालत की अवमानना का आधिकारिक नोटिस जारी किया था। इसके बाद उन्होंने बिना शर्त अदालत से माफी मांगते हुए अपना गहरा खेद व्यक्त किया था, लेकिन इसके तुरंत बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लगभग उसी तरह की आपत्तिजनक सामग्री दोबारा सार्वजनिक रूप से साझा कर दी। राज्य बार काउंसिल द्वारा नोटिस दिए जाने के बावजूद उनकी तरफ से कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया, जिसके बाद बीसीआई ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इस पूरे मामले की सुनवाई अपने हाथ में ले ली।

​अनुशासनात्मक कार्यवाही से दूरी बनाकर चुनाव मैदान में डटे रहने वाले उम्मीदवार की मुश्किलें बढ़ीं

​सुनवाई के दौरान भी नरेंद्र जैन का रवैया समिति की नजर में बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं रहा। बीसीआई ने बताया कि उन्होंने पहले तो सुनवाई टालने का आधिकारिक अनुरोध किया और बाद में वे लगातार सभी पेशियों से अनुपस्थित ही रहे। समिति ने उनके इस असहयोगी रवैये को भी गंभीर अनुशासनहीन आचरण माना है। आदेश में कहा गया कि इस तरह के गंभीर कदाचार के बावजूद यदि किसी अधिवक्ता को वकालत जारी रखने की छूट दी जाए तो इससे आम जनता और कानून के पेशे के प्रति बहुत गलत संदेश जाएगा। इसी कड़े आधार पर बीसीआई ने उन्हें देश के किसी भी न्यायालय, अधिकरण या अन्य विधिक मंच पर अधिवक्ता के रूप में पेश होने से हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। वहीं, इस ऐतिहासिक कार्रवाई के ठीक बीच उनका मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल चुनाव में लगातार शीर्ष दावेदारों में बने रहना कानूनी हलकों में बहुत बड़ी चर्चा और बहस का विषय बन गया है।

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