
जबलपुर। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर 12 जुलाई 2026 को हीराकुंड एक्सप्रेस के रुकने को लेकर हुआ विवाद अब एक बड़े प्रशासनिक घटनाक्रम में बदल गया है। डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट नरेंद्र चाहर के साथ आरपीएफ जवानों द्वारा की गई अभद्रता और उन्हें घसीटकर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में मुख्य आरोपी आरपीएफ जवानों के निलंबन और जीआरपी में केस दर्ज होने के बाद अब उच्च अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गाज गिरी है। रेलवे ने आगरा के सीनियर डीएससी पी राजमोहन का तबादला करते हुए उन्हें नॉर्थ फ्रंटियर रेलवे के लूप लाइन कंस्ट्रक्शन विभाग में डिप्टी सीएससी के पद पर भेज दिया है। इस कार्रवाई से रेलवे के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
दोषियों पर हुई सख्त कार्रवाई का सिलसिला शुरू
इस प्रकरण में अनुशासनहीनता को लेकर रेलवे ने कड़ा संदेश दिया है। घटना के तुरंत बाद 4 आरपीएफ जवानों को सस्पेंड कर दिया गया था जिनमें 2 एएसआई और 2 आरक्षी शामिल हैं। इन जवानों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा मामले की निष्पक्ष जांच के लिए रेलवे ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। अब सीनियर डीएससी को दंड स्वरूप एनएफआर स्थानांतरित करना इस पूरे मामले में अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। जांच अभी जारी है और भविष्य में अन्य अधिकारियों की भूमिका सामने आने पर उन पर भी कड़ी कार्रवाई होने की पूरी संभावना है।
स्टेशन मास्टर्स और कर्मचारियों का तीखा आक्रोश
इस घटना ने पूरे रेलवे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। स्टेशन मास्टर्स एसोसिएशन और अन्य कर्मचारी संगठनों ने आरपीएफ की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर किसी भी अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारी प्रदर्शन और बढ़ते दबाव के कारण प्रशासन को तत्काल कठोर निर्णय लेने पड़े। कर्मचारियों की एकता ने प्रशासन को मजबूर कर दिया कि वे पद की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों और जवानों के खिलाफ बिना किसी ढील के कठोरतम दंड सुनिश्चित करें। इस पूरे मामले में रेलवे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जांच की आंच में कई और अफसर शामिल
आगरा स्टेशन कांड केवल एक घटना तक सीमित नहीं रह गया है। सीनियर डीएससी के ट्रांसफर के बाद से रेलवे के अन्य उच्च अधिकारियों में भी खलबली मची हुई है। लूप लाइन कंस्ट्रक्शन विभाग में ट्रांसफर को रेलवे की भाषा में पनिशमेंट पोस्टिंग माना जाता है जो अक्सर किसी बड़ी विफलता के बाद दी जाती है। उच्च स्तरीय जांच समिति अपनी रिपोर्ट सौंपने की तैयारी में है जिससे भविष्य में और भी प्रशासनिक स्तर पर बदलाव हो सकते हैं। यह पूरा मामला सुरक्षा बलों और स्टेशन संचालन के बीच समन्वय और व्यवहार पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर गया है। अब पूरी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है जो तय करेगी कि और किस पर कार्रवाई होगी।
