
मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने किया बिजली दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी का कड़ा विरोध,उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डालने की तैयारी नाकाम, जनसुनवाई में अडानी समूह की याचिका का विरोध

जबलपुर। मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने विद्युत नियामक आयोग की जनसुनवाई में अडानी समूह की सहायक कंपनी कोरबा पावर लिमिटेड द्वारा बिजली दरों में वृद्धि की मांग का पुरजोर विरोध किया है। राजधानी भोपाल में हुई इस महत्वपूर्ण सुनवाई में पावर मैनेजमेंट कंपनी के अधिवक्ता आशीष आनंद बर्नार्ड और विद्युत मामलों के जानकार राजेंद्र अग्रवाल ने प्रमुखता से अपना पक्ष रखा। उन्होंने मांग की कि जब कंपनी को लैंको अमरकंटक परियोजना का प्लांट बेहद कम कीमत पर मिला है, तो इस बचत का सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं को मिलना चाहिए न कि उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जाए। कोरबा पावर लिमिटेड ने आगामी 5 वर्षों के लिए फिक्स चार्ज 203 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 224 करोड़ रुपये करने तथा एनर्जी चार्ज 1.82 रुपये प्रति यूनिट करने की अनुमति मांगी है। इस याचिका के विरोध में दलील दी गई कि पूंजीगत लागत में आई कमी के बाद उपभोक्ताओं के लिए बिजली महंगी करने का कोई वैधानिक औचित्य नहीं बनता है।
बिजली दरों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव का कड़ा विरोध
विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखी गई आपत्तियों में कहा गया कि कोरबा पावर लिमिटेड ने घाटे में चल रही लैंको अमरकंटक परियोजना का बेहद कम कीमत पर अधिग्रहण किया था। इसके चलते कंपनी की वास्तविक निवेश लागत में भारी कमी आई है। नियम के अनुसार जब किसी बिजली उत्पादन केंद्र की स्थापना या अधिग्रहण लागत कम होती है, तो उससे उत्पादित होने वाली बिजली की दरें भी कम होनी चाहिए। इसी आधार पर जनसुनवाई में तर्क दिया गया कि प्लांट की खरीद में हुई बचत को सीधे तौर पर बिजली दरों में कटौती के रूप में प्रदेश के आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाना चाहिए।
सस्ते प्लांट की खरीद और आम उपभोक्ताओं का हित
सुनवाई के दौरान विद्युत मामलों के विशेषज्ञ राजेंद्र अग्रवाल ने यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि जब प्लांट सस्ते दाम पर खरीदा गया है, तो जनता को महंगी बिजली देने की मांग गलत है। लागत में आई गिरावट का सीधा फायदा बिजली की दरों में कमी के रूप में दिखाई देना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था के तहत मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी हर साल कोरबा पावर लिमिटेड से लगभग 300 मेगावाट बिजली खरीदती है, जिसकी अनुमानित वार्षिक लागत लगभग 600 करोड़ रुपये आती है। दरों में बढ़ोतरी होने से प्रदेश के खजाने और आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
ऋण समाधान प्रक्रिया और कंपनी का नया स्वरूप
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद 6 सितंबर 2024 को अडानी पावर ने कर्ज के संकट से जूझ रही लैंको अमरकंटक परियोजना का अधिग्रहण पूरा किया था। इस पावर परियोजना पर विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों का लगभग 14,631 करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज बकाया था। इसके विपरीत पूरी परियोजना का अधिग्रहण केवल 4,101 करोड़ रुपये की बेहद कम राशि में कर लिया गया। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि कर्जदाता बैंकों को अपनी कुल बकाया राशि पर करीब 72 प्रतिशत का बड़ा हेयर कट यानी नुकसान सहना पड़ा है। इस पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया के सफल समापन के बाद ही इस पावर परियोजना का नया नाम कोरबा पावर लिमिटेड रखा गया है।
