
जबलपुर। कोलकाता पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर निवासी कारोबारी महेंद्र गोयनका को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। गोयनका पर कटनी जिले के विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनियों में 1000 करोड़ की धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप है। फर्जी हस्ताक्षर के माध्यम से कंपनी पर नियंत्रण करने के मामले में पुलिस ने उसे दबोचा है। इस मामले में कोलकाता में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी, 467, 468 और 471 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोपी पूर्व में संजय पाठक के परिवार की कंपनी और यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में प्रबंधन के पद पर कार्यरत था। वित्तीय अनियमितता और कंपनी का माल गलत तरीके से बेचने के आरोपों के बाद से ही पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई थी।
फर्जीवाड़े का जाल बुनकर हथिया ली थी कंपनियां
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से कंपनी के दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की। उसने फर्जी हस्ताक्षर का इस्तेमाल करके पाठक परिवार के स्वामित्व वाली कई कंपनियों पर अपना मालिकाना हक और नियंत्रण जमा लिया था। यह पूरा मामला वित्तीय गबन और कंपनी की संपत्ति को अवैध तरीके से बेचने से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार गोयनका ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए निजी लाभ के लिए कंपनी के साथ बड़ा आर्थिक अपराध किया है। इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब मामले के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है ताकि धोखाधड़ी में शामिल अन्य सहयोगियों तक भी पहुंचा जा सके।
न्यायालय से राहत न मिलने पर हुई कार्रवाई
आरोपी के खिलाफ कटनी में भी 420, 120बी, 467, 468 और 471 धाराओं के तहत अलग-अलग मामले दर्ज हैं। आरोपी और उसके सहयोगियों की ओर से अग्रिम जमानत के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद से ही आरोपी करीब 2 साल से फरार चल रहा था। मामले में एक नया मोड़ तब आया जब मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण ने 9 मई 2025 को अपने आदेश में महेंद्र गोयनका और उनकी पत्नी मीनू गोयनका द्वारा किए गए वित्तीय गबन का उल्लेख किया था। इसके बाद से ही कानून का शिकंजा उन पर कसता गया और अंततः पुलिस उसे पकड़ने में सफल रही।
