
डिंडोरी। जिले में प्रशासनिक लापरवाही का एक बड़ा मामला सामने आया है जहां अमरपुर जनपद पंचायत के सिधौली गांव में खुले आसमान के नीचे रखी 50 ट्रक धान बारिश में पूरी तरह खराब हो रही है। इस गंभीर बात का खुलासा तब हुआ जब शहपुरा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे और जिला पंचायत अध्यक्ष रुदेश परस्ते जन विश्वास अभियान में शामिल होने के लिए इसी मार्ग से गुजर रहे थे। अचानक दोनों नेताओं ने रास्ते में रुककर इस ओपन कैंप का निरीक्षण किया तो वहां की वास्तविक स्थिति देखकर हैरान रह गए। खुले में पड़ी धान पानी में लगातार भीग रही थी और शासन का लाखों रुपया इस तरह बर्बाद हो रहा था जिसे देखकर जनप्रतिनिधियों ने तीखा आक्रोश जताया।
अचानक रास्ते में रुका जनप्रतिनिधियों का काफिला
शुक्रवार को अपने तयशुदा राजनीतिक कार्यक्रम के तहत जब यह काफिला गुजर रहा था तभी सिधौली गांव के पास सड़क किनारे धान के बड़े ढेर नजर आए। बारिश के इस मौसम में इस तरह खुले आसमान के नीचे बहुमूल्य अनाज को छोड़ देना स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और खरीदी केंद्रों के प्रबंधकों पर बहुत बड़े सवाल खड़े करता है। जिम्मेदार अधिकारियों की गहरी लापरवाही के कारण किसानों द्वारा खून पसीना एक कर उगाई गई फसल पानी में घुलकर बर्बाद हो रही है। इस दृश्य को देखकर वहां मौजूद हर कोई हैरान रह गया क्योंकि एक तरफ जहां योजनाएं चलाई जा रही हैं वहीं दूसरी तरफ अनाज यूं ही सड़ रहा है।
गरीबों में बांटने की उठी पुरजोर मांग
मौके पर स्थिति का जायजा लेते हुए विधायक ओमप्रकाश धुर्वे ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई और कहा कि यदि समय रहते इस धान को गरीबों के बीच वितरित कर दिया जाता तो यह समाज के लिए अधिक उपयोगी साबित होती। इस प्रकार खुले में सड़ने और बर्बाद होने देने से कहीं ज्यादा बेहतर यह होता कि जरूरतमंद लोगों का पेट भर जाता। इस तरह की लचर व्यवस्था और लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर अब उच्च स्तर पर चर्चा किए जाने की बात कही जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी व्यवस्थागत लापरवाही की पुनरावृत्ति कभी न हो सके।
समय पर मिलिंग के लिए नहीं भेजी धान
गंभीर जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया कि समय पर धान को मिलिंग के लिए नहीं भेजा गया जिसके कारण यह भारी संकट उत्पन्न हुआ है। पॉलीथीन के अंदर पैक धान के अलावा खुले में पड़ी भारी मात्रा बारिश के पानी में पूरी तरह भीगकर खराब हो चुकी है। शासन प्रशासन के लाखों रुपए का सार्वजनिक नुकसान होने के बाद अब क्षेत्र के आम नागरिकों और किसानों में भी गहरा रोष व्याप्त है। सभी लोग मांग कर रहे हैं कि इस प्रकार की लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में अन्न का ऐसा अपमान न हो सके।
