मुख्यमंत्री के दौरे की कवरेज में चूक: जबलपुर के वरिष्ठ अधिकारी को थमाया नोटिस,हड़कंप

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Newzo - News Editor 19 Views
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जबलपुर। जनसंपर्क विभाग के आयुक्त मनीष सिंह ने जबलपुर संभागीय जनसंपर्क कार्यालय के उप संचालक माथन सिंह उइके को शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही और उदासीनता बरतने के आरोप में कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह प्रशासनिक कार्रवाई 7 जुलाई, 2026 को छिंदवाड़ा में आयोजित जन-विश्वास अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार में भारी चूक साबित होने के बाद की गई है। इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान मुख्यमंत्री और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के बीच हुए संवाद का प्रेस नोट जिला जनसंपर्क कार्यालय छिंदवाड़ा द्वारा समय पर जारी नहीं किया गया और न ही इसकी सूचना मुख्यमंत्री प्रेस प्रकोष्ठ को दी गई, जिसके चलते यह अहम खबर प्रमुख समाचार-पत्रों में प्रकाशित होने से वंचित रह गई।

अधिकारी से कहां हो गयी चूक

​संभागीय अधिकारी होने के नाते माथन सिंह उइके का यह प्राथमिक और मुख्य दायित्व बनता था कि वे मुख्यमंत्री के सभी दौरों, सभाओं और कार्यक्रमों की प्रचार-प्रसार गतिविधियों का पूरी गंभीरता, सजगता और सूक्ष्मता के साथ पर्यवेक्षण करते। लेकिन उनके स्तर पर इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को निभाने में भारी ढिलाई और उदासीनता देखने को मिली है। इस प्रकार की लापरवाही से शासन की कल्याणकारी योजनाओं और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का संदेश सही समय पर आम जनता और मीडिया तक नहीं पहुंच पाता है, जो कि विभागीय कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं माना जा सकता है।

​जनहितैषी योजनाओं पर विपरीत प्रभाव

​इस पूरे मामले का कड़ाई से संज्ञान लेते हुए उच्चाधिकारियों ने इसे प्रथम दृष्ट्या गंभीर अनुशासनहीनता माना है। यह कृत्य सीधे तौर पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के प्रासंगिक प्रावधानों के बिल्कुल विपरीत है। इसके अलावा यह पूरा मामला मध्य प्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील नियम 1966 के अंतर्गत पूरी तरह से दंडनीय श्रेणी में आता है। प्रशासनिक व्यवस्था में इस तरह की सुस्ती और कार्य के प्रति लापरवाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है, क्योंकि इससे सरकार की जनहितैषी नीतियों के प्रचार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

​नियत समय पर स्पष्टीकरण देना होगा

​इस संबंध में आयुक्त जनसंपर्क कार्यालय की ओर से बेहद कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं कि संबंधित अधिकारी तीन दिवस के भीतर अपना लिखित कारण स्पष्ट करें कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। यदि तय समय सीमा के अंदर अधिकारी की तरफ से कोई भी उत्तर या संतोषजनक स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है, तो यह मान लिया जाएगा कि इस मामले में उन्हें अपना बचाव करने के लिए कुछ नहीं कहना है। ऐसी स्थिति में विभाग की तरफ से उनके खिलाफ बिना किसी विलंब के एकपक्षीय कार्रवाई कर दी जाएगी।

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