
जबलपुर। रांझी स्थित सेंट्रल एकेडमी स्कूल में राष्ट्रध्वज तिरंगे की घोर उपेक्षा का सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्कूल परिसर में फहराया गया तिरंगा बेहद गंदा और फटा हुआ पाया गया जिसकी तस्वीरों के वायरल होने के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश फैल गया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आशुतोष वत्स, जग्गू विश्वकर्मा, नारायण गुप्ता, सरबजीत सिंह नारंग, निर्मल जैन, राहुल डोंगरे, के. के. मिश्रा, राजेश श्रीवास और सोनू गुप्ता समेत कई जागरूक नागरिकों ने रांझी थाने पहुंचकर प्रबंधन के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ताओं ने साक्ष्य और वीडियो फुटेज पुलिस को सौंपते हुए प्रबंधन पर सख्त कार्यवाही की मांग की है। मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और दोषियों पर नियमानुसार कार्यवाही का आश्वासन दिया है।
तिरंगा महज कागज का टुकड़ा नहीं
तिरंगा महज एक कपड़े का टुकड़ा नहीं बल्कि देश के करोड़ों लोगों के स्वाभिमान और बलिदान का प्रतीक है। शिक्षा का केंद्र माने जाने वाले संस्थानों में यदि राष्ट्रध्वज का ऐसा अपमान हो तो यह चिंता का बड़ा विषय है। स्कूल प्रशासन की यह बड़ी चूक है कि उन्होंने इतने समय तक फटे हुए और गंदे झंडे को फहराए रखा। स्थानीय लोगों का तर्क है कि जिस स्थान पर देश का भविष्य तैयार होता है वहां ऐसी लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। यह घटना पूरे शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे सीधे तौर पर देशद्रोह जैसा अपराध मान रहे हैं। बच्चों को देशभक्ति सिखाने वाले संस्थान खुद ही नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की
शिकायत मिलने के बाद रांझी थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से संज्ञान में लिया है। सब-इंसपेक्टर मयंक यादव ने बताया कि आशुतोष वत्स और उनके साथियों द्वारा दिए गए आवेदन के साथ ही फुटेज भी उपलब्ध कराए गए हैं। पुलिस की एक टीम मामले की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह गलती अनजाने में हुई है या इसके पीछे कोई लापरवाही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तिरंगे के अपमान से जुड़े कानूनों के तहत उचित धाराओं में कार्यवाही की जाएगी। तथ्यों की पुष्टि होते ही संबंधित स्कूल प्रबंधन पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा और उन्हें जवाबदेह बनाया जाएगा। इस घटना ने शहर के अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक बड़ी सीख दी है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से यह मांग की है कि जिले के सभी निजी और सरकारी स्कूलों में राष्ट्रध्वज के रखरखाव की औचक जांच कराई जाए। यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि कहीं और भी तिरंगे का अपमान तो नहीं हो रहा है। नागरिकों का मानना है कि यदि शिक्षण संस्थानों ने अनुशासन नहीं बनाया तो आने वाली पीढ़ी को हम क्या संस्कार देंगे। यह लड़ाई केवल एक झंडे की नहीं बल्कि राष्ट्र के प्रति सम्मान को कायम रखने की है। अब सबकी निगाहें इस मामले में होने वाली पुलिस कार्यवाही पर टिकी हैं।
