
जबलपुर। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अंतर्गत आने वाले सभी विभागों और प्रकोष्ठों की सभी स्तरों की इकाइयों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है. यह बड़ा प्रशासनिक आदेश मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा बुधवार को जारी किया गया है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देशों के तहत यह बड़ा संगठनात्मक बदलाव किया गया है. इस महत्वपूर्ण फैसले की आधिकारिक प्रतिलिपि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं को भेज दी गई है. पार्टी के आगामी स्थानीय निकायों, पंचायतों और विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय को संगठन में व्यापक फेरबदल और एक नई टीम के गठन की दिशा में उठाया गया सबसे प्रभावी कदम माना जा रहा है.
जमीनी स्तर पर नई राजनीतिक हलचल शुरू हुई
इस बड़े राजनीतिक फैसले का असर जबलपुर समेत प्रदेश के सभी जिलों में साफ तौर पर दिखाई देने लगा है. युवा, किसान, विधि, चिकित्सा, आईटी, व्यापार, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समेत सभी विभागों की इकाइयां इस नए आदेश के दायरे में पूरी तरह आ चुकी हैं. इन सभी इकाइयों का अब आने वाले दिनों में नए सिरे से पुनर्गठन किया जाएगा. इस कार्रवाई से जिला, शहर और ब्लॉक स्तर पर प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बहुत ज्यादा तेज हो गई है. विभिन्न विभागों और प्रकोष्ठों के सभी पुराने अध्यक्ष, संयोजक और पदाधिकारी अब अपने पदों से पूरी तरह मुक्त मान लिए गए हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक सामान्य प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर संगठन को धरातल पर दोबारा सक्रिय करने की एक बड़ी सोची-समझी रणनीति है. आने वाले समय में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों के साथ-साथ भविष्य के विधानसभा चुनावों को भी पूरी गंभीरता से ध्यान में रखा जा रहा है. पार्टी इस कदम के जरिए जमीनी स्तर पर नई ऊर्जा और बिल्कुल नए नेतृत्व को मैदान में उतारना चाहती है.
युवाओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को मिलेगा नया मौका
संगठन के इस कड़े और व्यापक निर्णय के बाद प्रदेश कांग्रेस में नियुक्तियों और दावेदारी को लेकर सियासी गतिविधियां और कयासबाजी काफी तेज हो गई है. जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से संगठन के भीतर लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि कई विभाग प्रभावी तरीके से काम नहीं कर पा रहे थे और संगठन में काफी निष्क्रियता आ गई थी. इन सभी गंभीर कमियों को दूर करने के लिए ही आलाकमान ने यह सख्त कदम उठाया है ताकि कामकाज में तेजी लाई जा सके. अब नए सिरे से होने वाले गठन में युवाओं, महिलाओं, विभिन्न सामाजिक वर्गों और पार्टी के प्रति पूरी तरह समर्पित सक्रिय कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने के भरपूर अवसर मिलने की प्रबल संभावना जताई जा रही है. इससे पुराने और सुस्त पड़ चुके समीकरणों को पीछे छोड़कर एक ऊर्जावान टीम तैयार करने का रास्ता साफ हो गया है. प्रदेश के आम कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर काफी उत्साह है कि अब जमीनी स्तर पर काम करने वालों को सीधे तौर पर संगठन में बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी.
आगामी चुनावों के मद्देनजर पुनर्गठन की पूरी तैयारी
मध्य प्रदेश की राजनीतिक फिजा में इस फैसले के बाद भूचाल आ गया है क्योंकि कांग्रेस पार्टी अब किसी भी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं है. पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि संगठन को मजबूत किए बिना आगामी चुनावी मैदान में उतरना संभव नहीं है. जिला, शहर से लेकर ब्लॉक स्तर तक की पुरानी व्यवस्थाएं स्वतः समाप्त मान ली गई हैं और अब नए चेहरों को जिम्मेदारी सौंपने का दौर शुरू होगा. इस पूरी प्रक्रिया पर दिल्ली से लेकर भोपाल तक के वरिष्ठ नेताओं की पैनी नजर बनी हुई है. पार्टी के सभी नेता अब इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि कैसे बूथ और जिला स्तर पर संगठन को मजबूत करते हुए जनता के बीच मजबूती से जाया जाए. आने वाले कुछ हफ्तों में नए पदाधिकारियों की सूचियां जारी होने की उम्मीद है, जिसके बाद कांग्रेस का राजनीतिक स्वरूप पूरी तरह बदला हुआ नजर आएगा.
