
जबलपुर। भारतीय रेलवे ने अपने लाखों कर्मचारियों के लिए एक क्रांतिकारी नीतिगत बदलाव की घोषणा की है जिसके तहत अब दो दशक की सेवा पूरी करने वाले कर्मियों के स्थानांतरण की राह पूरी तरह सुगम हो गई है। जबलपुर से सामने आई इस महत्वपूर्ण जानकारी के अनुसार रेलवे बोर्ड के उप निदेशक स्थापना संजय कुमार द्वारा बाईस जुलाई दो हजार छब्बीस को एक नया नीतिगत आदेश जारी किया गया है। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत बीस वर्ष से अधिक की नियमित सेवा पूरी कर चुके नॉन गजेटेड कर्मचारियों के स्वयं के अनुरोध पर होने वाले ट्रांसफर को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। सबसे खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया को इंसानी दखल से पूरी तरह मुक्त करते हुए मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली यानी एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह स्वचालित कर दिया गया है जिससे देश भर के सभी रेलवे जोनों में कार्यरत लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों में भारी उत्साह का माहौल बन गया है।
एचआरएमएस पोर्टल हर महीने तैयार करेगा संयुक्त वरीयता सूची
हर माह की पहली तारीख को यह डिजिटल पोर्टल सभी पात्र कर्मचारियों की एक एकीकृत प्राथमिकता सूची स्वतः तैयार कर लेगा। इस सूची में केवल उन्हीं कर्मियों के नाम शामिल किए जाएंगे जिनकी नियमित सेवा बीस वर्ष या उससे अधिक हो चुकी है। प्राथमिकता का यह निर्धारण पूरी तरह से सेवाकाल के वर्षों के घटते क्रम के आधार पर तय किया जाएगा ताकि सबसे अनुभवी कर्मचारियों को सबसे पहले उनके पसंद के स्थान पर भेजा जा सके।
अब ट्रांसफर के लिए नहीं लेनी होगी अलग से एनओसी
इस पारदर्शी डिजिटल प्रणाली के लागू होने के बाद कर्मचारियों को अब किसी भी तरह के अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जैसे ही किसी स्वीकार्य यूनिट में कोई पद रिक्त होगा, पोर्टल पर उपलब्ध प्राथमिकता सूची के आधार पर ट्रांसफर आर्डर खुद-ब-खुद जारी हो जाएगा जिसे ही अंतिम और पूरी तरह मान्य आदेश माना जाएगा।
तय समय सीमा के भीतर होगी कर्मचारियों की कार्यमुक्ति
रेलवे बोर्ड ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि आर्डर जारी होने के पंद्रह दिनों के भीतर सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी से कर्मचारी को शारीरिक रूप से कार्यमुक्त करना पूरी तरह अनिवार्य होगा। किसी भी विशेष परिस्थिति में केवल मंडल रेल प्रबंधक यानी डीआरएम को ही यह अधिकार होगा कि वह इस प्रक्रिया को अधिकतम एक महीने के लिए रोक सकें, जिसके बाद आदेश स्वतः निष्पादित हो जाएगा।
यह सुविधा केवल एक ही पद और कैडर पर लागू होगी
यह नई विशेष योजना केवल उन कर्मचारियों पर लागू की जाएगी जो अपने वर्तमान पद और कैडर में रहते हुए सिर्फ स्थान परिवर्तन चाहते हैं। विभाग या कैडर बदलने की इच्छा रखने वालों और बीस वर्ष से कम सेवा वाले कर्मियों के लिए पुरानी व्यवस्था ही लागू रहेगी जिसके क्रियान्वयन के लिए रेलवे बोर्ड ने दो महीने का समय तय किया है।
