
जबलपुर। आगरा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ द्वारा स्टेशन प्रबंधक के साथ की गई मारपीट और दुर्व्यवहार की घटना ने पूरे भारतीय रेल नेटवर्क में खलबली मचा दी है। इस घटना के विरोध में देशभर के रेल कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और दोषियों की बर्खास्तगी की मांग तेज हो गई है। रेल प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की है, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दोषी आरपीएफ कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। आगरा की यह शर्मनाक घटना जबलपुर रेल मंडल के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है। जबलपुर से इटारसी और मानिकपुर रेल खंड तक आरपीएफ की कथित अवैध वसूली और अवैध वेंडर्स के साथ मिलीभगत का जाल फैला हुआ है। सूत्र बताते हैं कि इन रूटों पर करीब 2000 से 3000 अवैध वेंडर सक्रिय हैं, जिनसे हर दिन 2 से 3 लाख रुपये की वसूली की जाती है। पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्यालय के नाक के नीचे चल रहे इस खेल ने वाणिज्य विभाग के कर्मचारियों को असुरक्षित कर दिया है। यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारी ठोस कदम नहीं उठाते, तो जबलपुर में भी किसी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
क्या मुख्यालय के पास पनप रहा अवैध साम्राज्य
जबलपुर स्टेशन की परिधि में अवैध वेंडर्स का बोलबाला किसी बड़े संगठित अपराध से कम नहीं है। वाणिज्य विभाग के अधिकारी जब भी इन अवैध वेंडर्स पर कार्रवाई करने का प्रयास करते हैं, तो उन्हें आरपीएफ का कड़ा विरोध झेलना पड़ता है। आरपीएफ कर्मी न केवल इन अवैध वेंडर्स को छुड़ा लेते हैं, बल्कि कार्रवाई करने वाले निरीक्षकों को झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी भी देते हैं। एक वरिष्ठ वाणिज्य निरीक्षक ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि आरपीएफ का दबाव इतना अधिक है कि उन्हें शारीरिक प्रताड़ना और महिला वेंडर्स के माध्यम से गंभीर आरोप लगवाने की धमकी दी जाती है। इस प्रकार की डरावनी कार्यप्रणाली से वाणिज्य विभाग का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है और कर्मचारी खुद को बेहद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
सुरक्षा के नाम पर वसूली का काला खेल
जबलपुर रेल मंडल में सुरक्षा बल की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों की सेवा और सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाला आरपीएफ अब अवैध वसूली और समानांतर कैटरिंग व्यवस्था चलाने का जरिया बन चुका है। आरपीएफ की मिलीभगत से अवैध वेंडर ट्रेनों में बेरोकटोक सामान बेच रहे हैं, जिससे न केवल रेलवे को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी दांव पर है। जब सुरक्षा प्रहरी ही रक्षक के बजाय भक्षक बन जाए, तो आम रेल कर्मचारी और यात्रियों का भरोसा उठना स्वाभाविक है। प्रशासन को अब यह तय करना होगा कि क्या आरपीएफ का काम वसूली करना है या ट्रेनों में अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाना।
प्रशासनिक हस्तक्षेप ही रोकेगा बड़ी अनहोनी
आगरा की घटना के बाद जबलपुर के रेलकर्मियों में उपजी दहशत को खत्म करने के लिए महाप्रबंधक स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है। जब तक आरपीएफ की मनमानी पर लगाम नहीं लगेगी और अवैध वसूली के गिरोहों का पर्दाफाश नहीं होगा, तब तक काम का माहौल सुधारना असंभव है। कार्रवाई करने वाले कर्मियों को सुरक्षा की स्पष्ट गारंटी मिलनी चाहिए ताकि वे बिना डर के अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें। यदि प्रशासन ने अभी भी चुप्पी साधे रखी, तो भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी घटना की जिम्मेदारी सीधे तौर पर आला अधिकारियों की होगी। जबलपुर रेल मंडल को आगरा की गलती से सीख लेते हुए तुरंत जवाबदेही तय करनी होगी।
