राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर बना लिया मालिक
पुश्तैनी जमीन के लिए फर्जीवाड़ा का खुलासा

डिंडोरी। जिले की बजाग तहसील में जमीन हड़पने का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सुकुलपुरा गांव निवासी स्वर्गीय जियालाल वनवासी के पोते शिवराज ने आरोप लगाया है कि उनके दादा के चचेरे भाई गणेश वनवासी ने पटवारी नर्मदा मुराली के साथ मिलकर फर्जीवाड़ा किया है। जियालाल का निधन 1996 में हो गया था और उनके वारिसों को पता था कि बजाग में उनके दादा की जमीन है। लेकिन 2021-22 में गणेश ने सुनियोजित तरीके से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया और तहसील न्यायालय से मिलीभगत कर खुद के पिता हरिलाल का नाम हटाकर दस्तावेजों में जियालाल का नाम जुड़वा लिया। 11 लाख रुपये मूल्य की इस जमीन पर अब गणेश के परिजनों का अवैध कब्जा है, जिसके बाद पीड़ित परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है और प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं।
दस्तावेजों में हेराफेरी कर किया फर्जीवाड़ा
जमीन के असली मालिक जियालाल वनवासी की मौत के बाद उनके बेटे दशरथ और भगवान दास तथा चार पोते सलीम, शिवराज, राकेश और रमेश वारिस थे। गणेश वनवासी ने मौके का फायदा उठाते हुए ग्राम पंचायत से जियालाल का गलत मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करवाया। पटवारी के साथ साठगांठ कर राजस्व रिकॉर्ड में खेल किया गया और खसरा नंबर 132 की 0.0300 हेक्टेयर जमीन को अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज करवा लिया। इस जालसाजी में गणेश ने अपने पिता हरिलाल की जगह जियालाल का नाम चढ़ाकर मालिकाना हक ही बदल दिया।
अपनों से छीनी पुश्तैनी संपत्ति,जांच की मांग
इस पूरे घटनाक्रम में गणेश वनवासी ने अपने परिजन कैलाश, कल्लू, काली बाई, राम बाई, मुन्नी बाई, प्रहलाद और भगवती का नाम भी सरकारी दस्तावेजों में जुड़वा दिया। वर्तमान में खसरा नंबर 134 की 0.0800 हेक्टेयर जमीन अभी भी स्व. जियालाल के नाम पर दर्ज है। साल 2025 में गणेश की मौत के बाद अब उनकी पत्नी नन्ही बाई और बच्चे इस जमीन का उपयोग कर रहे हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि भरोसे का लाभ उठाकर रिश्तेदार ने खून के रिश्तों को धोखा दिया है और सरकारी तंत्र के साथ मिलकर उनकी पुश्तैनी संपत्ति पर कब्जा जमा लिया है। अब प्रशासनिक जांच के बाद ही असली सच सामने आएगा।
