डिंडौरी में भ्रष्टाचार पर बड़ा एक्शन, शहपुरा सीएमओ सस्पेंड

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Newzo - News Editor 19 Views
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डिंडौरी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग आयुक्त ने शहपुरा नगर परिषद की मुख्य नगरपालिका अधिकारी रीना सिंह राठौर को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। यह बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई परिषद अध्यक्ष शालिनी अग्रवाल द्वारा की गई गंभीर शिकायतों के बाद अमल में लाई गई है। आयुक्त द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक सीएमओ पर जेम पोर्टल के नियमों की अनदेखी करने, बिना वित्तीय स्वीकृति के सीसी रोड का निर्माण कराने और अपने ही परिजनों को आर्थिक लाभ पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं। इसके अतिरिक्त जल गंगा संवर्धन योजना में बिना आवश्यकता बोरवेल खोदकर सरकारी धन का दुरुपयोग करने की बात भी सामने आई है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास संभाग जबलपुर तय किया गया है।

​शहपुरा नगर परिषद में नियमों को ताक पर रखकर किए कार्य

​सीएमओ रीना सिंह राठौर पर जेम पोर्टल और ऑनलाइन निविदा प्रक्रियाओं की अनदेखी कर सामग्री खरीदने का आरोप है। उन्होंने परिषद अध्यक्ष और पार्षदों को पूरी तरह अंधेरे में रखकर शहर में सीसी रोड का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया। इसके लिए सक्षम अधिकारियों से किसी भी प्रकार की तकनीकी या वित्तीय स्वीकृति नहीं ली गई थी। सबसे गंभीर मामला अपने ही परिवार के लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाने का है। रीना सिंह राठौर ने नियमों के विरुद्ध जाकर अपने परिजनों को परिषद की एजेंसी नियुक्त किया और उन्हें 200000 रुपए का सीधा फायदा पहुंचाया। इसके अलावा जल गंगा संवर्धन योजना के तहत बिना किसी जरूरत के जबरन बोरवेल निर्माण कराए गए जिससे सरकारी बजट की भारी बर्बादी हुई।

​तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट में वित्तीय भ्रष्टाचार उजागर

​परिषद अध्यक्ष और पार्षदों की शिकायतों के बाद विभाग ने एक तीन सदस्यीय विशेष जांच समिति का गठन किया था। इस समिति की गोपनीय रिपोर्ट में स्वागत द्वार के निर्माण, दुकानों के आवंटन और अन्य विकास कार्यों में भारी प्रक्रियागत कमियां पाई गईं। नियमों के विपरीत जाकर ठेकेदारों को मनमाने भुगतान किए गए जिससे नगरीय निकाय को भारी आर्थिक क्षति पहुंची। वर्तमान में रीना सिंह राठौर के खिलाफ 4 अन्य मामलों में भी विभागीय जांच प्रक्रियाधीन है। लगातार मिल रही शिकायतों और जांच समिति की पुष्टि के बाद आयुक्त ने यह सख्त रुख अपनाया है। निलंबित अधिकारी को अब मुख्यालय जबलपुर में अटैच किया गया है जहां उन्हें नियमानुसार सिर्फ जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

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